चरखी दादरी। जिले की नहरों में 17 अप्रैल से पानी छोड़ा जाएगा। वर्तमान में अधिकांश जलघर खाली पड़े हैं और जिले को पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए करीब 900 क्यूसिक पानी की आवश्यकता है। जिले में 60 से अधिक जलघर संचालित हैं जिनके माध्यम से 168 गांवों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। फिलहाल फसल कटाई पूरी होने के कारण सिंचाई के लिए पानी की मांग नहीं है लेकिन आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने के साथ पेयजल की खपत बढ़ने की संभावना है।
जिले के घसोला, मंदोला, कलियाणा, जावा, चांगरोड़, दातोली, ढाणी फौगाट, चिड़िया, पांडवान, पालड़ी, मिसरी, बौंद कलां, अचीना, रानीला, इमलोटा, चरखी, पैंतावास, झोझू कलां, घिकाड़ा, सांवड़, सांजरवास सहित कई गांवों के जलघर नहरों के पानी पर निर्भर हैं।
24 दिन में आती है नहरी पानी की बारी
अधिकारियों के अनुसार जिले की प्रमुख नहरों में बधवाना, मैहड़ा, बौंद कलां डिस्ट्रीब्यूटरी व लोहारू कैनाल शामिल हैं। जिले के 68 से अधिक जोहड़ भी नहरों से जुड़े हैं। नहरी पानी की बारी 24 दिन में आती है। पिछली बार पर्याप्त मात्रा में पानी मिला था, लेकिन इस बार गर्मी को देखते हुए जलघरों और जोहड़ों को पूरी क्षमता तक भरना जरूरी है।
18 अप्रैल तक पहुंचेगा जिले की नहरों में पानी
सिंचाई विभाग के अनुसार 17 अप्रैल को खुबड़ू हेड से पानी छोड़ा जाएगा, जो 18 अप्रैल तक जिले की नहरों में पहुंच जाएगा। नहरों में 16 दिनों तक पानी प्रवाहित किया जाएगा। यदि जनस्वास्थ्य विभाग उचित प्रबंधन करे तो इस अवधि में सभी जलघर भरे जा सकते हैं। इस बार गर्मी सीजन को देखते हुए विभाग अधिकारियों को सतर्कता दिखाने की जरूरत है ताकि कम कम से 20 दिन का तो पानी जलघरों में स्टोरेज होे सके।
सिंचाई के लिए खपत शून्य
इस बार फसल कटाई पूरी होने से सिंचाई के लिए पानी की मांग लगभग शून्य है। ऐसे में विभागीय समन्वय बेहतर रहा तो नहरों और माइनरों की टेल तक पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सकता है। हालांकि यमुना में जलस्तर कम होने के कारण पीछे से पानी की उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है। सिंचाई विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि 17 अप्रैल को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हेड से पानी छोड़ दिया जाएगा।