शहर में सप्लाई किए जा रहे पानी के सेवन से इंफेक्शन फैल सकता है लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं है। चंपापुरी जलघर के टैंकों में एक सप्ताह के अंदर तीन घटनाओं में दो गोवंश टैंक में गिरने से दम तोड़ चुके हैं लेकिन इसके बावजूद न तो ऐसी घटनाओं को रोकने को ठोस प्रबंध किए गए हैं और न ही वाटर टैंकों की सफाई करवाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर पशु की मौत पानी में डूबने से होती है और शव पानी में घंटों तक रह जाता है तो वह पानी सप्लाई के लायक कतई नहीं है। ऐसे पानी का सेवन करने वाले शख्स की मृत्यु तक हो सकती है।
एक सप्ताह के अंदर जलघर के टैंकों में गोवंशों के गिरने की तीन घटनाएं हुई हैं। गोभक्त रिंपी फौगाट, विक्रम, कृष्ण फौगाट, संजय चाहर, मनोज सिंगला, आशिष चौहान, राजन और पवन ने बताया कि शुक्रवार रात चंपापुरी स्थित जलघर के टैंक में गिरने से एक गोवंश की मौत हो गई। शनिवार सुबह टैंक से शव को बाहर निकालने के लिए गोभक्तों की टीम पहुंची। गोभक्तों ने बताया कि सूचना देने के बाद भी जनस्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। उन्होंने अपने स्तर पर ही एक घंटे के प्रयास के बाद मृत गोवंश को टैंक से बाहर निकाला और इसके बाद दफना दिया।
गोभक्तों ने बताया कि चंपापुरी जलघर के वाटर टैंक में एक सप्ताह के अंदर गोवंश गिरने की तीन घटनाएं हो चुकी हैं। पहली घटना गत सात मार्च की है। उस समय टैंक में गिरे गोवंश को डेढ़ घंटे के प्रयास के बाद बाहर निकाल लिया गया था। रिंपी फौगाट और संजय चाहर ने बताया कि गत 12 मार्च को भी चंपापुरी जलघर के टैंक में एक गोवंश गिर गया था। 13 मार्च की सुबह उनकी टीम ने शव को टैंक से बाहर निकाला था। शनिवार सुबह एक और गोवंश का शव उन्होंने टैंक से बाहर निकाला है। गोभक्तों ने बताया कि एक सप्ताह में ऐसी तीन घटनाएं हुई हैं जिनमें से दो में गोवंशों की मौत हुई है।
टैंकों की तलहटी में गाद, पानी पर तैर रही काई
जिले में 58 जलघर हैं जिनमें से 12 सूखे पड़े हैं जबकि 30 से अधिक की पिछले लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। शहर के चंपापुरी जलघर की बात करें तो पिछले दो सालों से टैंकों की सफाई नहीं हुई है। नहरी पानी को फिल्टर करने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग सप्लाई करने के दावे कर रहा है जबकि जमीनी हकीकत इससे उल्ट है। चंपापुरी जलघर के टैंकों की तलहटी में गाद जमा है जबकि पानी के उपर काई तैर रही है। इस समय जलघरों के चारों टैंकों की सफाई कराने की दरकार है।
गोभक्तों ने जताया रोष
गोभक्त रिंपी फौगाट, विक्रम, कृष्ण फौगाट, संजय चाहर, मनोज सिंगला ने बताया कि टैंकों का पानी गोवंशों के दम तोड़ने से दूषित हो रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी या कर्मचारी तो मौके पर भी नहीं पहुंचते। टैंकों का पानी सीधा शहर में सप्लाई किया जाता है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली के खिलाफ गोभक्तों ने रोष जताया।
एक्सपर्ट व्यू : खतरनाक है ऐसे पानी का सेवन करना : डॉ. संजय
डिप्टी सीएमओ संजय गुप्ता ने बताया कि ऐसा पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे पानी के सेवन से पेट की बीमारियां या इंफेक्शन हो सकता है। पाचन तंत्र के साथ शरीर के किसी भी अंग पर ऐसे पानी का प्रभाव पड़ सकता है। कई दफा तो इंफेक्शन बढ़ने पर मौत तक हो सकती है। पानी को पीने से पहले उबाल जरूर लें।
टैंक में गोवंश गिरने की मुझे जानकारी नहीं है। मैं अपनी टीम से इसकी जानकारी लूंगा। अगर टैंक में गोवंश गिरा है तो यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात किए जाएंगे। पानी को फिल्टर करने के बाद ही सप्लाई किया जाता है।
सतेंद्र कुमार, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग