चरखी दादरी। रविवार को हुई बारिश के पानी की निकासी बुधवार शाम तक वार्डाें की गलियों से नहीं हुई है। अभी भी विभिन्न वार्डाें की 40 से अधिक गलियों में पानी भरा हुआ है और इसके चलते लोग बेहद परेशान हैं। दूसरी ओर पानी निकासी की कवायद शुरू न होने से शहरवासियों में विभाग के खिलाफ रोष बना है। वार्ड के पार्षदों का कहना है कि अधिकारियों को समस्या से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन नतीजा सिफर है। उन्होंने बताया कि जलभराव के चलते लोग लंबी दूरी तय करने को विवश हैं।
गत तीन दिनाें से शहर के अनेक क्षेत्रों में भरे बारिश के पानी की निकासी न होने से लोग समस्याओं का सामना कर रहे हैं। वहीं, पानी निकासी में हो रही देरी से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की नाकामी के चलते कई गलियाें में और धार्मिक स्थानों के सामने पानी भरा हुआ है। इसकी निकासी न होने से लोग पानी से होकर गुजरने को विवश हैं। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से आबादी वाले क्षेत्रों में भरे पानी की तुरंत निकासी करवाने की मांग की है, ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके।
मंगलवार को मुथरी घाटी, वाल्मीकि नगर, रविदास नगर, बस स्टैंड के पीछे स्थित कॉलोनी, शनि देव मंदिर वाली गली, कीकरवासनी क्षेत्र, वार्ड 17 स्थित स्वर्ण शताब्दी पार्क, एमसी कॉलाेनी, काठ मंडी स्थित राजकीय कन्या स्कूल आदि क्षेत्रों के लोगों ने जलभराव के खिलाफ रोष जताया। शहरवासी नितिन, मंजीत, सुभाष, दीपक, अनीता, मोहिनी, केला देवी, गीता, सुनीता और प्रीति ने कहा कि गलियों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित है। प्रशासन को समस्या पर संज्ञान लेकर समाधान करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही पानी की निकासी नहीं हुई तो लोग बीमारियों का शिकार हो जाएंगे।
हनुमान मंदिर के अंदर भरा पानी
श्रद्धा व आस्था का केंद्र कीकरवासनी स्थित बड़ा हनुमान मंदिर में हर रोज श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। वहीं, हर मंगलवार को यहां दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु मन्नत मांगने पहुंचते हैं। आलम ये है कि मंदिर के अंदर और बाहर पानी भरा है जिससे श्रद्धालुओं को परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मंदिर से पानी की निकासी जल्द करवाने की मांग की है।
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हमारे कर्मचारी शहर से बारिश का पानी निकालने में जुटे हुए हैं। मंदिर के पास बने जोहड़ पर भी अतिरिक्त मोटर लगवा दी है। जल्द ही शहर से पानी की निकासी करवा दी जाएगी। -बीके जावला, जेई जनस्वास्थ्य विभाग