चरखी दादरी। भाई चार दिन लिकड़गै, घरनै घूंट पानी भी नी आया सै। कम त कम आज तो पानी छोड़ो। इस प्रकार की मोबाइल कॉल उपभोक्ता अपने क्षेत्र के की-मैन से कर रहे हैं। कुछ की-मैन ने तो उपभोक्ताओं के फोन उठाने ही बंद कर दिए हैं।
भीषण गर्मी में लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा हो गया है। जलघरों के अधिकतर स्टोरेज टैंक खाली होने वाले हैं। ऐसे में जनस्वास्थ्य विभाग की एक दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई करने की समयसारिणी भी चरमरा गई है। सप्लाई का कोई निश्चित समय नहीं रहा। कई बार तो रात 11 बजे तो कभी सुबह तीन बजे पानी छोड़ दिया जाता है। अभी नहरों में नौ दिन में बाद पानी आएगा। ऐसे में स्थिति और भी खराब होगी। लोगों ने विभाग अधिकारियों से गर्मी के मौसम में पहली सप्लाई सुबह साढ़े चार देने की मांग की है।
जनस्वास्थ्य विभाग के एक कीमैन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शहर के पाहवा चौक, पुराना शहर एरिया, दिल्ली बाइपास बूस्टिंग स्टेशन की मुख्य लाइन से पेयजल सप्लाई सुबह तीन बजे शुरू कर दी जाती है। इसी प्रकार अन्य भागों में भी रात 10 बजे बाद सप्लाई की जाती है।
शहरवासी बोले - जब जनता सो रही होती है, तब छोड़ दिया जाता पानी
शहर निवासी संतोष, शमशेर सिंह, दलेल, पूजा नर्गिस, गर्विका, विद्या व संतोष आदि का कहना है कि पानी की सप्लाई का कोई निश्चित समय भी नहीं है। कीमैन से फोन करते हैं तो ज्यादातर समय वे कॉल तक रिसीव नहीं करते हैं। कॉल रिसीव हो जाती है तो सप्लाई का निश्चित समय नहीं बता पाते। इतना कहना है कि जब जनता सो रही होती है, तब पानी छोड़ दिया जाता है। लोगों ने कहा कि विभाग को गर्मी में सुबह साढ़े चार बजे सप्लाई शुरू करनी चाहिए। सर्दी में सप्लाई का शेड्यूल अलग होना चाहिए। लोगों का कहना है सुबह साढ़े चार से रात नौ बजे तक 17 घंटे सप्लाई की जा सकती है।
लोगों को खरीदना पड़ रहा पानी
भीषण गर्मी में लोग पेजयल संकट से जूझ रहे हैं। कई वार्डों में चार-चार दिन से पानी नहीं आ रहा है। लोगों को पीने और घरेलू कामों के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है। सोमवार को ही पेयजल किल्लत झेल रहे वार्ड 21 के लोगों ने विभाग के खिलाफ रोष जताया था। इसके साथ ही मुख्य कार्यालय में मटका फोड़ प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी।
जलघरों के टैंकों में पानी की कमी के चलते राशनिंग की जा रही है। सभी कीमैन को इस बारे में आवश्यक निर्देश दे रखे हैं। शहर में पेयजल सप्लाई सुबह साढ़े चार बजे से शुरू कर की जाती है। ऐसे में कीमैन अपने स्तर पर ऐसा टाइमटेबल न बनाए, जिससे जनता को सुविधा का लाभ ही नहीं मिल पाए। - धीरेंद्र सांगवान, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।