चरखी दादरी। जिले के पांच गांवों में अंतिम छोर तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए छिल्लर-गोठड़ा माइनर बनाई जा चुकी है। किसानों का कहना है कि इसके 27 साल बाद भी माइनर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच सका है जबकि सिंचाई विभाग हर साल इसकी सफाई करवाता है। माइनर से जलघर और तालाब भी जुड़े हैं जबकि 800 किसान सिंचाई के लिए इसी पर निर्भर हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से माइनर में पानी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी की आपूर्ति हो सके।
वर्ष 1997 में गांव बलकरा, मौड़ी, गोठड़ा, छिल्लर, मंदोला के ग्रामीणों और किसानों को नहरी पानी आपूर्ति के लिए आठ किमी लंबी छिल्लर-गोठड़ा माइनर का निर्माण करवाया गया था लेकिन सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण 27 साल गुजर जाने के बाद भी नहरी पानी नहीं पहुंच पाया है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग हर साल इसकी सफाई के नाम पर भले ही लाखों रुपये खर्च कर रहा हो, लेकिन माइनर में केवल बारिश के समय दूषित पानी ही छोड़ा जाता है। इस कारण किसानों में सिंचाई विभाग के खिलाफ गहरा रोष है। उन्होंने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से माइनर में पानी छुड़वाने की मांग की है ताकि खेतों और घरों को नहरी पानी मिल सके।
किसानों का कहना है कि माइनर से 800 किसानों की करीब ढाई हजार एकड़ जमीन सिंचित हो सकती है। अगर सिंचाई विभाग माइनर में पर्याप्त पानी छोड़ दे तो किसानों को सिंचाई में आसानी होगी और फसलों की सिंचाई के लिए उन्हें पानी नहीं खरीदना पड़ेगा। इससे खेती पर उनका लागत खर्च भी कम होगा। संवाद
दस हजार की आबादी हो नहीं मिल रहा पानी : ग्रामीण सतेंद्र कुमार, जगमेंद्र छिल्लर, विनोद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, नवीन कुमार, गुरमीत सिंह, मुकेश और मुंशीराम आदि ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से पानी न छोड़ने के कारण इन गांवों के जलघर सूखे रहते हैं। ऐसे में लगभग दस हजार की आबादी नलकूपों का पानी पीने के लिए मजबूर हैं।