चरखी दादरी। मैं गांव समसपुर का सीतराम जोहड़ हूं, जब से खेड़ा बसा है तब से मेरा अस्तित्व है। मैं गांव समसपुर स्थित हनुमान मंदिर के पास बना हूं। जब से गांव का खेड़ा बसा है तब से मेरा अस्तित्व बरकरार है। इस समय मैं सुंदरीकरण के इंतजार में हूं। मैं दो एकड़ में फैला हूं। ग्रामीणों ने मेरा पूरा ख्याल रखा है, जिससे मेरा पानी आज भी अपनी गुणवत्ता एवं शुद्धता बनाए हुए है। पशु व अन्य जीव-जंतु मेरे पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं।
दिल्ली रोड पर शहर से करीब चार किलोमीटर दूरी पर स्थित सीतराम जोहड़ की अपनी अलग पहचान है। यहां हनुमान मंदिर भी बना है। समीप ही अखाड़ा है जहां पहलवान अभ्यास करते हैं। जोहड़ में माइनर से पानी भरा जाता है। धार्मिक मान्यता एवं प्राचीन खेड़े से जुड़े होने के कारण समय-समय पर ग्रामीणों की ओर से जोहड़ की सफाई भी समय-समय पर की जाती है। खास बात है कि जोहड़ में गांव का दूषित पानी नहीं जाता है इससे पानी की गुणवत्ता बरकरार है। मेरे किनारे एक कुई भी बनी हुई थी जो अब जर्जर हो चुकी है। मेरा घाट कच्चे रूप में है। चहारदीवारी का भी मुझे इंतजार है। मुझे अपना अस्तित्व बचाने के लिए इस समय चहारदीवारी निर्माण व सुंदरीकरण की सख्त जरूरत है। सरकार को अमृत सरोवर के नाम पर मेरी भी सुध लेनी चाहिए ताकि मैं लंबे समय तक जीव-जंतुओं की प्यास बुझाता रहूं।
जब से गांव का खेड़ा बसा है तब से यह जोहड़ अपना अस्तित्व बनाए हुए है। जोहड़ का पानी साफ एवं शुद्ध है। माइनर से इसमें पानी भर दिया जाता है। ग्रामीण जोहड़ में पशुओं को पानी पिलाते हैं। जोहड़ गांव के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ा रहा है। इस समय अगर इसका सुंदरीकरण हाे जाता है तो और भी बेहतर होगा। जोहड़ के चारो ओर पेड़ हरियाली को बढ़ावा दे रहे हैं।
-विरेंद्र उर्फ सोनू
यह जोहड़ पुराना इतिहास समेटे हुए है। पुराने जमाने में लोग जोहड़ के पानी का इस्तेमाल करते थे। बारिश के मौसम में जोहड़ पानी से लबालब हो जाता है। अब तो इसके सुंदरीकरण की जरूरत है। गांव का दूषित पानी जोहड़ में नहीं जाता। इसके किनारे पर मंदिर बना है। इसके किनारे ही हर साल धार्मिक मेला लगता है जिसमें बड़े स्तर पर कुश्ती दंगल आयोजित होता है।
-कोच बिजेंद्र सिंह