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कचरा प्रबंधन नहीं होने से शहर में कूड़ा समस्या

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जेसीबी मशीन से कचरे के ढेर का समायोजन करते हुए । - फोटो : CharkhiDadri
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शहर में सोलर वेस्टेज प्लांट के बिना रोजाना निकलने वाले कचरे का स्थायी प्रबंधन नहीं है। प्लांट ही नहीं कचरा डालने को लेकर जगह की कमी भी अब खल रही है। इस समय शहर में रोजाना 48 क्यूम (करीब 10 टन) कचरा निकल रहा है। तीन ट्रैक्टर-ट्राली के जरिये कचरे का दिनभर उठान होता है। कचरे का डोर-टू डोर उठान होता है।
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शहर में वार्डों की संख्या भी बढ़कर 21 तक पहुंच गई है, जबकि पहले शहर में 19 वार्ड थे। शहर के बाहरी एरिया में रिहायशी मकानों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है, लेकिन सफाई व्यवस्था करीब एक दशक पुराने ढर्रे पर ही चली आ रही है। नगर परिषद गठन होने के साथ-साथ शहर में नई अनाज मंडी व नई सब्जी मंडी भी शुरू हुई हैं। ऐसे में कचरे की मात्रा भी बढ़ती जा रही है, लेकिन कचरा व्यवस्था एवं उठान में इस अनुपात में कोई विस्तार एवं सुधार नहीं किया गया है। इससे शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार का ग्राफ बढ़ नहीं पा रहा है।
कचरा डालने के लिए जगह का भी ठीक रख-रखाव नहीं
नगर परिषद ने कई सालों तक शहर का कचरा कलियाणा रोड के समीप परिषद की एक एकड़ जमीन पर डाला था। यह जगह पिछले दिनों कचरे से पूरी तरह भर चुकी है। कई दिनों तक इस जगह की बार-बार खुदाई करके कचरे का समायोजन किया गया था। इस समय शहर के रानिया रोड पर कचरा डाला जा रहा है। यहां चार एकड़ जमीन है, जिस पर परिषद द्वारा कचरा डाला जा रहा है। इस जगह की 24.82 लाख रुपये के बजट से चारदीवारी बनवाई गई है। चारदीवारी का एरिया भी अब छोटा पड़ने लगा है।
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सॉलिड वेस्ट प्लांट ही है नगर परिषद के पास विकल्प
इस समय शहर में कचरे का स्थाई निस्तारण सॉलिड वेस्टेज प्लांट से ही किया जा सकता है। प्लांट में कचरे को रिसाइकल कर उसका स्थाई प्रबंधन किया जा सकता है। नगर परिषद को इस प्रोजेक्ट पर जल्द ही काम करने की जरूरत है, ताकि शहर के कचरे का स्थायी तौर पर समाधान हो सके।
रोजाना निकलता है शहर में 48 क्यूम कचरा
इस समय शहर में रोजाना 48 क्यूम कचरा निकल रहा है। इस कचरे के उठान के लिए तीन ट्रैक्टर-ट्राली लगा रखी हैं। जो दिन मेें कचरे के उठान के लिए आठ से नौ चक्कर लगा रही हैं।
डोर-टू-डोर उठ रहा कचरा
इस समय शहर में डोर-टू-डोर कचरे का उठान हो रहा है। पिछले करीब दो साल से डस्टबिन की संख्या भी बढ़ाई गई है। मेन बाजारों व वार्डों में डस्टबिन रखवाए गए हैं। पुराने डस्टबिन कंडम हो चुके थे। डस्टबिन की कमी के चलते लोग कचरे को खाली प्लाटों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डाल देते थे, जिससे कचरे का उठान नहीं हो पाता था।
नगर परिषद के पास हैं 14 वाहन
नगर परिषद ने डोर-टू-डोर कचरे का उठान करने के लिए शहर में 10 व्हीकल खरीद रखे हैं, ताकि वार्ड वाइज घरों में जाकर कचरे का उठान किया जा सके। इन वाहनों में स्पीकर भी लगा रखे हैं, तकि वाहन के गली में पहुंचने पर लोगों को पता चल सके।
रानिया जोहड़ के समीप अब कचरे का ढेर बढ़ता ही जा रहा है। इसका प्रबंध नहीं होने से विकट हालात बनने लगे हैं। इस मेन डंपिंग प्वाइंट पर अब जगह की भी कमी पड़ने लगी है। इसके लिए अब कचरे का स्थायी प्रबंधन करने की ही जरूरत है। कचरा निस्तारण और कचरा प्लांट की व्यवस्था करनी चाहिए। नगर परिषद चेयरमैन संजय छपारिया ने कहा कि मैं जल्द ही मौके का जायजा लूंगा। शहर के कचरे के निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट प्लांट लगाने का विषय विचाराधीन है। जल्द ही इस बारे में कोई प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि शहर को साफ-सुथरा बनाया जा सके।
नगर पार्षदों की राय
-नगर पार्षद महेश गुप्ता का कहना है कि जिला बन जाने पर अब शहर का दायरा भी बढ़ेगा। ऐसे में सॉलिड वेस्ट प्लांट का होना जरूरी है। इससे कचरे का जल्द ही निस्तारण होने पर प्रदूषण भी कम होगा। इस पर अभी से विचार करने की जरूरत है।
- वार्ड चार पार्षद दिनेश जांगड़ा का कहना है कि शहर में कचरे का स्थाई तौर पर प्रबंधन जरूरी है। तभी सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकता है। शहरवासियों को भी सफाई व्यवस्था में सहयोग करना चाहिए। आज सफाई व्यवस्था का बड़ा विषय है।
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