संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला बनने के बाद से सिविल अस्पताल में बंद पड़ी अल्ट्रासाउंड सेवा जल्द बहाल होगी। सात साल बाद यह सेवा दोबारा शुरू करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय से नई अल्ट्रासाउंड मशीन मांगी है। इससे पहले हाल ही में सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की गई है। उन्होंने पदभार संभालते ही मशीन की कमी बताकर सीएमओ कार्यालय की मार्फत मांग मुख्यालय भिजवा दी।
सिविल अस्पताल के लिए आखिरी अल्ट्रासाउंड मशीन वर्ष 2006 में खरीदी गई थी। करीब 9 साल तक इस मशीन का लाभ मरीजों को मिला। इसके बाद दादरी के जिला बनते ही सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद हो गई। 2017 से 2020 तक अल्ट्रासाउंड मशीन बंद कमरे में धूल फांकती रही। 2020 में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने के बाद जब अल्ट्रासाउंड कक्ष को खोलकर मशीन का निरीक्षण करने के बाद इसे कंडम घोषित कर दिया गया। नई मशीन की खरीद प्रक्रिया होने से पहले ही तत्कालीन रेडियोलॉजिस्ट का तबादला हो गया।
अब डॉ. दीपिका ने बतौर रेडियोलॉजिस्ट सिविल अस्पताल में ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने पदभार संभालते ही नई मशीन की मांग मुख्यालय से की है। उन्होंने बताया कि जल्द ही उनकी डिग्री आ जाएगी और इसके बाद रेडियोलॉजिस्ट के पंजीकरण के लिए आवेदन कर देंगी। तब तक अल्ट्रासाउंड मशीन की खरीद भी मुख्यालय की ओर से कर ली जाएगी। ये दोनों प्रक्रिया पूरी होते ही सिविल अस्पताल में वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू करने का प्रयास रहेगा।
प्रतिदिन होते थे 30 से 40 अल्ट्रासाउंड
जिले में सिविल अस्पताल के अलावा मातृ-शिशु अस्पताल, तीन सीएचसी और 124 पीएचसी हैं। इनमें से अल्ट्रासाउंड सुविधा का लाभ सिविल अस्पताल में ही मिलेगा। जिस समय मशीन वर्किंग में थी, उस समय प्रतिदिन 30-40 अल्ट्रासाउंड होते थे जबकि जिला बनने के बाद मरीजों की संख्या बढ़ना स्वभाविक है।
हर साल रेफर होते हैं 10 हजार मरीज
सिविल अस्पताल से प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड के लिए 50 मरीज रेफर किए जाते हैं। इस लिहाज से अगर एक साल में 200 कार्यदिवस मानें तो 12 हजार मरीज रेफर किए गए हैं। अब सात साल की अगर बात करें तो यह आंकड़ा 70 हजार तक पहुंच जाता है।
निजी केंद्रों पर निर्भर है सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा
जिले में सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा पिछले करीब छह सालों से निजी केंद्र पर निर्भर है। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं के लिए शहर के अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों से कांट्रेक्ट किया हुआ है। गर्भवती महिलाओं को सिविल अस्पताल से पर्ची देकर इन केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा जाता है। उन्हें इसके बदले 450 रुपये तो नहीं चुकाने पड़ते, लेकिन भागदौड़ में काफी समय बर्बाद हो जाता है।
विशेषज्ञों की भी खल रही कमी
दादरी सिविल अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, एमडी मेडिसिन नहीं हैं। इसके अलावा यहां गाइनी की कमी भी खल रही है। इसके चलते मरीजों को इलाज के लिए यह तो निजी अस्पताल में जाना पड़ता है या फिर दूसरे शहरों की भागदौड़ करनी पड़ती है।
नई अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग मुख्यालय भेज दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग से जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड सेवा बहाल करने का प्रयास रहेगा। - डॉ. दीपिका, रेडियोलॉजिस्ट, सिविल अस्पताल।