चरखी दादरी। जिले में बिजली ट्यूबवेल को निर्धारित 8 घंटे के बजाय मुश्किल से छह घंटे ही बिजली मिल पा रही है। किसान संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि रबी की फसलों की बोआई के लिए किसानों को 10 घंटे तीन फेस बिजली मिलनी चाहिए।
किसानों का तर्क है कि आठ घंटे के शेड्यूल में से दो घंटे अघोषित पावर कट लग जाते हैं। इससे सिंचाई कार्य बाधित होता है। जिले में करीब 6,500 बिजली ट्यूबवेल कनेक्शन हैं। झोझू कलां, कादमा और बाढड़ा क्षेत्र में बिजली चालित नलकूपों की संख्या सर्वाधिक है।
किसानों से स्लैब प्रणाली के आधार पर बिजली बिल वसूला जाता है। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है। ऐसे में सिंचाई के लिए बिजली मोटर पर निर्भरता अधिक है। नहरी पानी की उपलब्धता भी कम है, जिससे सिंचाई पूरी तरह संभव नहीं है।
रेतीले क्षेत्रों में जल संकट
जिले के रेतीले क्षेत्रों में सिंचाई का मुख्य साधन जमीनी पानी है। रेत के टीले होने के कारण नहरी पानी से सिंचाई मुश्किल होती है। कई सालों से कम बारिश के कारण भूमिगत जलस्तर लगातार घट रहा है। इससे आने वाले समय में पेयजल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। खरीफ की फसलें मानसून की बारिश पर निर्भर करती हैं।
ढाणियों में बिजली आपूर्ति और समाधान
किसानों का कहना है कि खेतों में बसी ढाणियों में शाम को आठ बजे बिजली आपूर्ति की जाती है। निगम को यह आपूर्ति शाम छह बजे से करनी चाहिए। इन ढाणियों को कृषि क्षेत्र की लाइनों से जोड़ा गया है। बिजली की बचत के लिए किसान अब सौर ऊर्जा सिस्टम भी लगवा रहे हैं। निगम प्रत्येक कनेक्शन के लिए अलग से ट्रांसफार्मर लगाता है।
सरकार को रबी की फसलों की बिजाई के लिए 10 घंटे तीन फेस की बिजली देनी चाहिए। आठ घंटे के शेड्यूल में भी पावर कट लग रहे हैं जिससे सिंचाई का काम बाधित हो रहा है। सरकार को किसानों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। किसान पर समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं की मार पड़ रही है। इस बार मानसून की बारिश काफी कम हुई है।
-हरपाल सिंह भांडवा, अध्यक्ष भाकियू