चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में सोमवार से पहली बार मरीजों को टोकन व्यवस्था के जरिये एक्स-रे सुविधा का लाभ मिला। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अगले 10 दिन तक ये व्यवस्था लागू रहेगी। इसके परिणाम अनुसार स्थानीय अधिकारी आगामी निर्णय लेंगे। टोकन व्यवस्था लागू होने से मरीजों को नंबर व तब तक लगने वाले समय का पता चल गया और पहले की तरह उन्हें एक्स-रे कक्ष के बाहर खड़े होकर बारी आने का इंतजार नहीं करना पड़ा।
डेंटल निदेशक डॉ. कुलदीप गौरी एक मई की सुबह सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। वे जब एक्स-रे कक्ष के सामने पहुंचे तो बाहर मरीजों की भीड़ मिली। ज्यादातर मरीज खड़े होकर बारी आने का इंतजार करते मिले। इस व्यवस्था को देखकर डॉ. कुलदीप गौरी ने नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को यहां टोकन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। इस पर जिला स्वास्थ्य विभाग ने ऑर्थो ओपीडी के मरीजों के लिए नई व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी। सोमवार को सिविल अस्पताल की ओपीडी करीब 1200 रही और इनमें से एक्स-रे करवाने वाले मरीजों की संख्या करीब 150 रही। नई व्यवस्था का लाभ ये हुआ कि मरीजों को टोकन मिलते ही नंबर का पता चल गया। इसके बाद उन्होंने प्रतीक्षालय हॉल में कुर्सियों पर बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार किया। मरीजों की मानें तो नई व्यवस्था ठीक लगी, बशर्तें सुविधाओं में बढ़ोतरी की गुजाइंश अभी भी है।
केवल सिविल अस्पताल में ही है एक्स-रे सुविधा
जिले में सिविल अस्पताल के अलावा मातृ-शिशु अस्पताल, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं और इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्स-रे सुविधा का प्रावधान है। फिलहाल केवल दादरी सिविल अस्पताल में ही एक्स-रे हो रहे हैं। अस्पताल में पहले एक ही शिफ्ट में एक्स-रे होते थे, लेकिन कुछ समय पहले विभाग ने दो शिफ्ट में एक्स-रे सुविधा शुरू करवाई है। अब शाम सात बजे तक मरीजों को एक्स-रे सुविधा का लाभ मिलता है। जल्द ही दो सीएचसी में एक्स-रे सुविधा शुरू होने की उम्मीद है।
मरीज बोले- परेशानी न हो, ऐसी व्यवस्था हो लागू
सिविल अस्पताल में एक्स-रे करवाने पहुंचे मरीज संदीप, अमित, रोशन, रमेश, अंकिता, सुमित्रा व नवीन का कहना है कि अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। सोमवार की व्यवस्था पहले से बेहतर रही।
डेंटल निदेशक डॉ. कुलदीप गौरी के निर्देशानुसार एक्स-रे सुविधा के लिए टोकन व्यवस्था लागू कर दी है। पायलट प्राेजेक्ट के तौर पर 10 दिन तक ये व्यवस्था लागू रखकर देखेंगे और उसके बाद ही उच्चाधिकारी के निर्देशानुसार कदम उठाया जाएगा।
डॉ. बिजेंद्र, डीएमएस, सिविल अस्पताल