चरखी दादरी। लवणीय भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए किसान एक एकड़ खेत में चार से पांच मुंडेर लगाकर मीठा एवं मिट्टी के उपयुक्त पौष्टिक पानी भरें। इससे जमीन की ऊपरी सतह पर मौजूद लवणीय न्यूट्रेंस जमीन के नीचे चले जाएंगे। इसके अलावा उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए इस जमीन में तोरया, ढेंचा व जौ की बिजाई भी किसान कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लवणीय जमीन पर दलहन की खेती कतई न करें।
आजकल हर जिले में लवणीय जमीन किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इसके अलावा रसायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल व देसी एवं जैविक खाद का कम उपयोग करने की वजह से जमीन की उपजाऊ शक्ति हर साल क्षीण होती जा रही है। सेम ग्रस्त जमीन का क्षेत्र लगातार बढ़ा है।
लणवीय जमीन होने पर पैदावार कम होने लगती है। जमीन के पोषक तत्व धीरे-धीरे कम एवं खत्म हो जाते हैं। जमीन में कई बार सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति खत्म हो जाती है।
लवणीय जमीन की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के लिए एक एकड़ में चार से पांच मुंडेड़ बनाकर इसमें खासा पानी भर दें। यह सिलसिला कुछ दिन के अंतराल में लगातार जारी रखें। गाढ़ा पानी भरने से लवणीय न्यूट्रेंस जमीन के नीचे चले जाएंगे और धीरे-धीरे जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ने लगेगी।
इस जमीन में इन फसलों पर ध्यान दें
लवणीय जमीन में खरीफ सीजन में ढेंचा की बिजाई करें। ढेंचा की फसल 40 से 45 दिन की होने के बाद इसकी हेरो से जुताई कर दें। इससे हरी खाद मिट्टी में मिल जाएगी जो लवणीयता को कम करेगी। इसी प्रकार रबी सीजन के दौरान जौ की बिजाई करें। जौ के पौधे की जड़ से जमीन की लवणीयता खत्म होती है। गेहूं की भी तीन-चार ऐसी किस्में हैं जो लवणीयता को कम करने में सहायक होती हैं। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर गेहूं की इन किस्मों की बिजाई की जा सकती है। तोरया भी लवणीयता को कम करता है।
किसान लवणीय भूमि को ठीक करें। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों से भी सलाह लें। लवणीयता खत्म करने वाली फसलों की बिजाई करें।
डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी, कृषि विभाग।