चरखी दादरी। नई अनाज मंडी में वीरवार को चौथे दिन भी सरसों की आवक कम ही रही। आवक कम रहने का कारण मौसम का बदला मिजाज रहा। मंडी के गेट पर सुबह से शाम तक तीन गेटपास कटे और गेटपास कटवाने वाले किसानों ने सरकारी एजेंसी की बजाय ई-नेम पोर्टल के माध्यम से आढ़तियों को अपनी पैदावार बेची। लगातार चौथे दिन भी सरसों की सरकार खरीद नहीं हो पाई। वहीं, बारिश के चलते मंडी में सरसों की दो ढेरी भी भी गई।
सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज सभी किसानों की 15 मार्च से सरसों की सरकारी खरीद शुरू करने का आदेश जारी किया हुआ है। जिले के ज्यादातर किसानों ने अभी सरसों की कटाई नहीं की है और इसके चलते मंडी में आवक बेहद कम है। पिछले तीन दिनों में जहां एक भी गेटपास नहीं कटा तो शनिवार को तीन किसानों ने गेटपास कटवाने के बाद खुली बोली में अपनी ढेरी बेची। दूसरी ओर कुछ किसान नमी और अन्य शर्तों के चलते सरकारी रेट पर अपनी पैदावार नहीं बेच पा रहे हैं।
नमी के कारण शनिवार को लगातार चौथे दिन भी हैफेड कर्मचारी सरसों खरीद से परहेज करते नजर आए। मार्केट कमेटी लेखाकार ने बताया कि शनिवार को तीन ही किसान गेटपास कटवाने पहुंचे और यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद उक्त किसानों ने एजेंसी की बजाय ई-नेम पोर्टल के जरिये अपनी उपज आढ़तियों को बेची। शनिवार को मंडी में 30 क्विंटल सरसों की आवक हुई।
- इन किसानों ने बेची पोर्टल के माध्यम से सरसों
चौथे दिन नई अनाज मंडी में ई-नाम पोर्टल के माध्यम से सरसों बेचने के लिए गांव चरखी निवासी अजीत सिंह, गांव झामरी निवासी अनिल कुमार व गांव चरखी निवासी ओमप्रकाश पहुंचे। तीनों किसानों ने दस-दस क्विंटल सरसों का टोकन कटवाया और बाद में आढ़तियों को इसे बेचा। किसानों ने बताया कि घरों में सरसों रखने के लिए जगह की कमी है और बारिश के चलते खलिहान में रखने पर भीगने का अंदेशा है।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत सभी किसानों की सरसों खरीदने के लिए तैयारियां पूरी हैं। फिलहाल मंडी में आ रही सरसों में नमी की मात्रा अधिक है, इसलिए सरकारी नियम पूरे न होने पर सरसों की खरीद नहीं कर रहे।
संदीप देशवाल, मैनेजर, हैफेड