चरखी दादरी। गांव बलाली में पंजाब के सीएम भगवंत मान ने द्रोणाचार्य अवॉर्डी विनेश के ताऊ महाबीर फौगाट से बातचीत कर साहस बंधाया। मान बुधवार को चरखी दादरी में आम आदमी पार्टी की रैली में पहुंचे थे। पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विनेश फाइनल में पहुंची तो तब कोई प्रतिक्रिया नहीं आई लेकिन जब डिस्क्वालिफाई कर दिया तो उनको ढांढस बंधाया जा रहा है।
भारतीय कुश्ती संघ पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को हक लेने के लिए पहले जंतर-मंतर पर लड़ना पड़ता है, वो समय उसका प्रैक्टिस का था। भारत सरकार जहां रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवा रही है, लेकिन खिलाड़ी के लिए कोई अपील नहीं की जा रही। जिस तरह से क्यूबा की खिलाड़ी को फाइनल के लिए चुन लिया गया, उससे आगे का अब ऑप्शन ही खत्म कर दिया गया।
खूब लड़ी मर्दानी ... दिग्गजों को हराया पर नियमों से हार गई फौलादी बिटिया
चरखी दादरी। पेरिस ओलंपिक में पहलवान विनेश फौगाट ने जिस तरह से धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था, उससे बलाली के लोगों और खेल प्रेमियों में जबर्दस्त खुशी का माहौल था। ग्रामीण विजेता बेटी के स्वागत और जश्न की तैयारी कर रहे थे तभी एक मनहूस खबर ने सबकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तय भारवर्ग से महज 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण विनेश को फाइनल खेलने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया और इस तरह दिग्गजों को धूल चटाने वाली फौलादी बिटिया नियमों से हार गई। खुशी पलभर में मायूसी में बदल गई।
विनेश के परिवार में घर पर सिर्फ उनकी मां हैं। विनेश के साथ ही उनका भाई भी पेरिस गया हुआ है। मंगलवार को ताऊ महाबीर फौगाट ने ग्रामीणों के साथ मिलकर उसके तीनों मैच देखे थे। उसकी जीत के बाद सभी काफी खुश थे। महाबीर दावा कर रहे थे कि विनेश अबकी बार स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेगी। वे खुद दिल्ली एयरपोर्ट जाएंगे। गांव में जबर्दस्त उत्साह था। जहां मंगलवार को ग्रामीणों ने मैच देखा था, वहीं पर सभी के साथ बुधवार रात को कुश्ती का फाइनल मुकाबला देखने की गांव वालों ने तैयारी कर रखी थी। ग्रामीण मैच का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन सुबह उन्हें विनेश के डिस्क्वालिफाई होने की खबर मिली तो ग्रामीण हतप्रभ रह गए।
ग्रामीण बोले-हाथ में आया पदक फिसल गया, अफसोस तो है
विनेश के मुकाबले देखकर काफी गर्व महसूस हो रहा था। जिस तरह से गीता-बबीता के बाद विनेश ने गांव का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमकाया उससे लग रहा था कि अबकि बार पेरिस ओलंपिक में पदक लेकर ही विनेश गांव लौटेगी। लेकिन विनेश के डिस्क्वालिफाई होने से काफी दुख हुआ। जीता हुआ पदक फिसल गया, इसका गहरा अफसोस है।
सोमवीर, बलाली
विनेश के गांव लौटने पर जोरदार स्वागत की तैयारियां करने की सोच रहे थे। अबकी बार उम्मीद थी कि विनेश ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटेगी। मात्र 100 ग्राम वजन के चलते जिस तरह उसे डिस्क्वालिफाई किया गया। उससे गांव में निराशा का माहौल है।
-अमित कुमार, बलाली
ओलंपिक जैसे खेलों के आयोजन में इतनी पड़ी चूक कैसे हो सकती है। अगर वजन बढ़ा हुआ था तो पहले के तीन मैच विनेश ने कैसे खेल लिए। फाइनल से पहले ही एकदम से डिस्क्वालिफाई कर देना गलत है। भारत सरकार को इस मामले में दखल देकर अपना विरोध जताना चाहिए।
प्रदीप फौगाट, बलाली
गांव में मैच को लेकर काफी उत्साह था, जैसे ही विनेश के डिस्क्वालिफाई होने का पता चला तो काफी निराशा हुई। विनेश गांव की बेटियों के साथ यहां के युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। विनेश ने जिस साहस और हिम्मत के साथ ओलंपिक में प्रदर्शन किया उससे स्वर्ण से कम कुछ भी मंजूर नहीं था।
अजय कुमार. बलाली
जिस तरह से विनेश ने एक दिन में तीन पहलवानों को हरा फाइनल तक का सफर तय किया उससे लग रहा था कि अब देश के खाते में कम से कम एक और पदक तो पक्का हो गया। अगले दिन विनेश के डिस्क्वालिफाई होने का पता चला तो यह काफी हैरानीजनक और अफसोस वाला रहा।
- रवि, गोपी,
विनेश फौगाट ने जिस तरह से सभी विवादों को भूलकर वापसी की वह काबिलेतारीफ है। लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था। यह देश के साथ खेल-खेल प्रेमियों के लिए भी काफी निराशाजनक है कि पदक के इतने पास जाकर खाली हाथ लौटना पड़ेगा।
- रमेश, गोपी,
विनेश को जिस तरह से वजन ज्यादा होने के कारण पदक के इतने पास जाकर मुकाबला गंवाना पड़ा वह काफी निराशाजनक है। यह देश के लिए भी काफी हैरान वाला है कि मात्र 100 ग्राम वजन के कारण पदक से वंचित होना पड़ा।
- अनिल, हड़ौदाकलां,
विनेश ने एक के बाद एक जिस तरह से एक ही दिन में तीन मुकाबले जीते और फाइनल में अपनी जगह बनाई उससे लग रहा था कि देश को महिला कुश्ती में अबकि बार स्वर्ण पदक पक्का मिलेगा। लेकिन जब उन्हें आज पता चला कि विनेश सभी तरह के मुकाबलों के लिए डिस्क्वालिफाई हो गई है तो उन्हें काफी निराशा हुई।
- बलजीत, काकड़ौली हट्टी,
गांव बलाली स्थित विनेश फौगाट घर जहां कोई चहल-पहल नहीं है।