चरखी दादरी। इस बरसात में जिले में करीब 80 मिमी बारिश हुई है जो सामान्य से करीब आधी है। इससे गांवों का भूजल स्तर ऊपर आने की उम्मीद भी धूमिल हो गई क्योंकि बारिश के पानी के संरक्षण के जरिये गांवों में भूजल स्तर ऊपर लाने की योजना थी। जिले के 25 गांवों का जमीनी पानी खारा है। ये पानी पीने लायक नहीं है।
जल संरक्षण की कमी के कारण जिले के अधिकतर गांवों में अब भूजल खारा होने लगा है। पिछले कुछ साल से न तो पर्याप्त बारिश हो रही है और न ही नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में मिल पा रहा है। आठ साल में दो बार ही 500 मिमी से ज्यादा सामान्य बारिश हुई है जबकि छह साल औसत से कम बारिश दर्ज की गई है।
इस बार भी स्थिति छह साल जैसी ही है जिस कारण भूजल स्तर ऊपर लाने की योजना को झटका लगा है। जिस तेजी से भूजल स्तर घट रहा है, उससे तो आने वाले समय में जिले के कुछ गांवों में पीने का पानी तक नहीं बचेगा। लगातार गिर रहे भूजल स्तर से खेती पर भी संकट आ सकता है।
जिले के गांव खेड़ी सनसनवाल, महराणा, झोझूकलां, झोझखुर्द, मंदोला, मंदोली, आदमपुर, बलाली, कलाली, रामलवास, रुदड़ोल, कांहड़ा सहित करीब 25 से ज्यादा गांवों में कुछ समय से जमीनी पानी खारा होने लगा है। पानी लवणीय एवं खारा है जो पीने लायक नहीं है।
गांव महराणा निवासी राजेंद्र सिंह का कहना है कि उनके क्षेत्र में जमीनी पानी खारा होने लगा है। गांव खेड़ी सनसनवाल निवासी मुखत्यार सिंह का कहना है कि उनके गांव की सीमा में भूमिगत पानी खारा हो गया है। पिछले कुछ साल से मानसून की नाकाफी बारिश की वजह से यह नौबत आई है। भविष्य में यह खेती योग्य भी नहीं रहेगा।
- मंदोला और झोझूकलां में बनी समस्या
मंदोला निवासी संजय का कहना है कि जमीनी पानी खारा होने के साथ घट भी रहा है। इससे पेयजल और कृषि के लिए पानी का संकट गहराने लगा है। गांव झोझूकलां निवासी सरपंच अशोक कुमार का कहना है कि उनके क्षेत्र में भी जमीनी पानी नहीं बचा है। सरपंच का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बारिश का कम होना इसका प्रमुख कारण है। आने वाले समय में ग्लेशियर पिघलने पर नहरी पानी भी कम हो जाएगा।
- यूं गिर रहा भूजल स्तर
अगस्त 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक जिले के 47 गांवों में भूजल स्तर हर वर्ष तीन से नौ फुट तक गिर रहा है। अगर ये ही हालात रहे तो अगले 20 साल बाद इस क्षेत्र में खेती करना तो दूर पेयजल भी मिलना मुश्किल हो पाएगा। खंड के गांव धनासरी में हर वर्ष औसतन 9.2 फुट भूजल स्तर गिर रहा है। इस गांव में वर्ष 2010 में भूजल स्तर 196.2 था जो वर्ष 2020 में 278.9 फुट था। अब यह 320.3 फुट पहुंच चुका है। अटल भूजल योजना के तहत हुए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2047 तक यह पानी 535.7 फुट गहराई में पहुंचने का अनुमान है। इस पानी में टीडीएस एवं फ्लोराइड की मात्रा भी तय मानकों से अधिक है।
पिछले 10 साल में हुई बारिश के आंकड़े
वर्ष - बारिश मिमी में
2014- 207
2015- 309
2016- 576
2017 - 315
2018 - 311
2019- 183
2020- 289
2021- 512
2022- 347
2023- 352
- बारिश के पानी की न करें बर्बादी
जलरक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र यादव का कहना है कि भूजल संभरण होने तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। बारिश में लोग पानी का हरसंभव संचयन करें। उसकी बर्बादी न होने दें। खेतों और गांव शामलात की खाली जमीन में पानी के कुंड बनाएं और उनमें पानी का संचयन करते रहें। इससे काफी हद तक सुधार आएगा। स्नान भी आधी बाल्टी पानी से करने का प्रयास करें।
बारिश कम होने का कारण जलवायु परिवर्तन है। इसका एक ही उपाय है कि बारिश के पानी का संचयन किया जाए। प्रत्येक गांव में पानी के कुंड बनाए जाएं। किसान खेतों में भी पानी संचयन का प्रबंध करें। बारिश के पानी की एक-एक एक बूंद बचाएं। ज्यादा संख्या में पौधे लगाएं क्योंकि वन वर्षा लाने में सहायक होते हैं। - राकेश कुमार, जल वैज्ञानिक।
बरसात में अच्छी बारिश होना जरूरी है। बारिश के पानी से ही जल संभरण होता है। हालांकि अब भी अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। - जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी, चरखी दादरी।