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किसानों ने फूंका पीएम का प्रतीकात्मक पुतला

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कितलानला टोल प्लाजा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रतीकात्मक पुतला फूंकते किसान। - फोटो : CharkhiDadri
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संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी मांगों को लेकर 75 दिन से धरने पर बैठे किसानों को आंदोलनजीवी कहने पर किसानों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंगलवार को कितलाना टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसानों ने पीएम के वक्तव्य की निंदा की और पुतला जलाकर रोष का इजहार किया। उन्होंने कहा कि मोदी का यह आचरण अहंकार की पराकाष्ठा है।
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47वें दिन धरने की अध्यक्षता नरसिंह डीपीई, बिजेंद्र बेरला, धर्मपाल महराणा, रणधीर कुंगड़, सज्जन कुमार सिंगला, सुभाष यादव, महेंद्र पंच ने संयुक्त रूप से की।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भूल रहे हैं कि देश को आजादी आंदोलनकारियों ने ही दिलाई थी। प्रधानमंत्री ने संसद में जो भाषण दिया उससे किसान ही नहीं बल्कि जवानों का भी अपमान हुआ है। मंगलवार को धरनास्थल पर राजू मान, बलबीर बजाड़, कमल प्रधान, दिलबाग ग्रेवाल, बीरमति, पूर्व सरपंच नरेंद्र फतेहगढ़, पूर्व सरपंच समुंद्र सिंह, सूबेदार सत्यवीर, रत्तन सिंह घिकाड़ा, राजेश पहलादगढ़, जमात अली, राजबीर बोहरा, मेहर सिंह धनाना, मास्टर विजयपाल, दिलबाग ढुल, जागेराम बोहरा, नरदेव अटेला, राजबीर गौरीपुर, रणधीर अटेला, सरोज श्योराण आदि मौजूद रहे।
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विधायक बोेले- गरीबी को नहीं गरीब को मिटाने पर उतारू सरकार
दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि किसान आंदोलन को भाजपा जाति, धर्म या क्षेत्र के हिसाब से बांटने का षड्यंत्र रच रही थी, जब वह कामयाब नहीं हुई तो प्रधानमंत्री मोदी मैदान में आये। उन्होंने किसानों में फूट डालने के लिए कहा कि तीन कृषि कानूनों का छोटे किसानों को फायदा होगा। हकीकत यह है कि नोटबंदी के वक्त भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि गरीब को फायदा होगा और धनवान को नुकसान होगा, लेकिन हुआ उल्टा ही। यही अब होने जा रहा है सरकार गरीबी को नहीं गरीब को ही मिटाने पर उतारू है।
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