चरखी दादरी। जिले में सभी ड्रेन की सफाई करवाने के लिए सिंचाई विभाग सर्वे करवाने जा रहा है। इनकी सफाई मनरेगा स्कीम के तहत नहीं, बल्कि जेसीबी मशीन से सफाई करवाई जाएगी। ड्रेन में कुछ मात्रा में पानी व गाद होने की वजह से मनरेगा श्रमिकों से यह कार्य संभव नहीं है। सर्वे के बाद विभाग सफाई के लिए टेंडर लगाएगा।
जिले में लोहारू जल सेवाएं मंडल के तहत नौ व बौंद कलां डिविजन के तहत 10 ड्रेन आती हैं। मानसून से पहले इनकी सफाई करवाना जरूरी हो जाता है। बारिश से खेतों में जलभराव के पानी की निकासी में ड्रेनों की विशेष भूमिका होती है। ड्रेनों के जरिये पानी को नहरों में डाला जाता है।
जलभराव से खराब हो जाती है पांच हजार एकड़ फसल
जिले में हर साल मानसून सीजन में जलभराव की वजह से करीब पांच हजार एकड़ जमीन में खरीफ की फसल खराब हो जाती है। खरीफ ही नहीं अगली रबी की बिजाई का काम भी देरी से पूरा हो पाता है। इससे किसानोंं को हर साल लाखों की चपत लगती रही है। जिले के गांव इमलोटा, अचीना, मोरवाला, सरूपगढ़, भागवी, कंहेटी, सातौर, लोहरवाड़ा, झिंझर, समसपुर, खातीवास, जयश्री, कमोद, मिसरी,रावलधी, चरखी, पैतावास, मानकावास, पांडवान, बिरही कलां, छपार, फतेहगढ़, साहुवास, बौंदकलां,रणकौली आदि गांवोंं में हर साल जलभराव की समस्या बनती है। इससे हर साल करोड़ोंं की सड़कें भी खराब हो जाती हैं। इस एरिया में हर साल नई सड़कें बनानी पड़ती हैं।
जिले से गुजरती हैं करीब 20 ड्रेन
ज्यादा बारिश होने पर किसान फसलों की बिजाई भी नहीं कर पाते। इससे उन पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती है। जिले के विभिन्न भागों से करीब 20 ड्रेन गुजरती हैं। इनके माध्यम से बारिश के पानी की निकासी कर नहरों में डाला जाता है। मानसून से पहले ड्रेन को साफ करना जरूरी है, ताकि पानी आपूर्ति में बाधा न होने पाए। वहीं, सिंचाई विभाग जलभराव वाले क्षेत्रों में अंडरग्राउंड पाइप ड्रेन भी बना रहा है।
-सभी ड्रेन की सफाई करवाने के लिए सर्वे की जाएगी। उसके बाद एस्टीमेट तैयार कर टेंडर लगाए जाएंगे। मानसून सीजन से पहले ड्रेन की जेसीबी से सफाई करवा दी जाएगी। मनरेगा श्रमिकों से यह कार्य संभव नहीं है।
- सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग