शहर के चंपापुरी क्षेत्र स्थित मुख्य जलघर।
चरखी दादरी। पानी के सैंपल फेल आने पर संज्ञान लेकर जनस्वास्थ्य विभाग ने जलघरों के फिल्टर मीडिया की सफाई करवा दी है। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा। अमर उजाला ने शहर और गांवों में पानी के सैंपल फेल आने के मुद्दे को अलग-अलग संस्करण में प्रमुखता से उठाया था और इसके बाद विभाग ने पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता में कमी लाने वाले कारणों की तरफ ध्यान दिया।
विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि पानी की गुणवत्ता बनाए रखने व उपचारित करने के लिए पानी में क्लोरिन पर्याप्त मात्रा में डाली जा रही है। अंतिम छोर तक पानी पहुंचने पर क्लोरिन का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो जाता है। बता दें कि पेयजल की गुणवत्ता के लिए फिल्टर सिस्टम का अपडेट होना जरूरी है। नए मीडिया फिल्टर पर एक लाख व फिल्टर की सफाई करवाने पर करीब 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है। वर्षों पुराने फिल्टर काम नहीं कर रहे थे। अब जरूरत के अनुसार नए मीडिया फिल्टर भी लगाए जाएंगे। अब तक 20 से ज्यादा जलघरों में मीडिया फिल्टर की सफाई करवाई जा चुकी है। इससे लोगों को अब स्वच्छ पानी पीने को मिलेगा। वैसे शहर में दूषित पानी पेयजल आपूर्ति को लेकर आए दिन विभाग के पास शिकायतें मिलती रही हैं।
- दो संस्करणों में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया मुद्दा
शहर से लिए गए पानी के सैंपल फेल आने पर अमर उजाला ने 30 अक्तूबर के संस्करण में
100 एमएल पानी में मिले 39 बैक्टीरिया, आपूर्ति कर बीमारियां बांट रहा जनस्वास्थ्य विभाग
नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। वहीं, गांवों के सैंपल फेल आने पर अमर उजाला ने 6 नवंबर के संस्करण में
ग्रामीण क्षेत्रों से 2100 की जगह लिए 1361 सैंपल, जांच में 570 मिले फेल नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
- शहर के जलघर में भी हो रहा काम
शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। इसके साथ पानी की गुणवत्ता भी खराब है। जो पानी सप्लाई होता है वह पीने लायक नहीं होता है। नगर की चंपापुरी कॉलोनी में करीब पांच दशक पुराना जलघर है। यह जलघर पुराने ढर्रे पर ही चला आ रहा है। अब यहां भी नया मीडिया फिल्टर लगने जा रहे हैं। यहां रोड़ी, बजर व दवा डालकर पानी को साफ किया जाता है। विभाग पानी में नियमित रूप से क्लोरिन भी डालता है। अंतिम छोर पर पानी पहुंचने पर क्लोरिन की मात्रा कम हो जाती है।
- पानी में न्यूट्रेंस संतुलित मात्रा में होने जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषक युक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारे पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है।
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जहां मीडिया फिल्डर खत्म हो चुके हैं उनको रिप्लेस कर नए लगाए जा रहे हैं। शेष मीडिया फिल्टरों की सफाई करवाई जा रही है। विभाग पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहा है। विभाग प्रतिदिन पानी में संतुलित मात्रा में क्लोरिन डाल रहा है। अंतिम छोर तक पानी पहुंचने पर इसका प्रभाव खत्म हो जाता है।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग