झोझू कलां। विश्व पर्यावरण दिवस अभियान की शृंखला में कस्बा झोझू कलां स्थित सेठ विशंभर दयाल सामुदायिक भवन में रविवार को आयोजित पर्यावरण महिला सम्मेलन में प्रसिद्ध जल संरक्षण विशेषज्ञ एवं जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का आह्वान किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रकृति और पानी के बिना विकास की कल्पना अधूरी है।
विश्व युवक केंद्र नई दिल्ली, ग्रामीण विकास मंडल तथा डॉ. हरीश चंद्र चैरिटेबल सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और ग्रामीणों ने भाग लिया। मैग्सेसे पुरस्कार और स्टॉकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित राजेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम पूरी दुनिया के लिए एक अनूठा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियां पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करेंगी तो खेती, पशुपालन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में आधुनिक भौतिक सुविधाएं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने राजस्थान के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक प्रयासों से नदियों के पुनर्जीवन की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि जल संरक्षण के माध्यम से गांवों में विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। पानी की उपलब्धता बढ़ने से पलायन कर चुके युवा भी अपने गांवों की ओर लौटे हैं।
उन्होंने कहा कि यही सामुदायिक शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जिसकी दुनिया सराहना करती है। जलपुरुष ने अरावली पर्वतमाला पर बढ़ते संकट को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अरावली का संरक्षण नहीं किया गया तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव दक्षिणी हरियाणा के लोगों को झेलना पड़ेगा। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अरावली बचाने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।
ग्रामीण विकास मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि संस्था पिछले चार दशकों से जल और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरण अभियान चला रही है। कार्यक्रम में पर्यावरणविद् डॉ. आरएन यादव, अरुण सांगवान, पूर्व सरपंच दलबीर गांधी और डॉ. राजेंद्र कौशिक ने भी विचार रखे। इस अवसर पर सुनीता हरीश, कविता और बिशन आर्य को सम्मानित किया गया।