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Charkhi Dadri News: स्वाद ने दिलाया सम्मान...ममता बनीं महिला सशक्तीकरण की पहचान

Sat, 13 Dec 2025 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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अचार की स्टॉल पर खड़ी ममता रानी व उनका बेटा।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। तहसील रोड पर खट्टे-मीठे और तीखे अचार की खुशबू से लोगो का ध्यान खींचने वाली ममता रानी आज जिले की नई पहचान बन चुकी हैं। घर की चहारदीवारी में सिमटी एक साधारण महिला से आत्मनिर्भर उद्यमी बनने तक का उनका सफर न केवल प्रेरणा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण की मजबूत मिसाल बन रहा है। झज्जर घाटी क्षेत्र निवासी ममता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाए गए मंच से अपने आप को मजबूत कर रही हैं। घर पर ही अचार बनाकर दो साल पहले शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास अब उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गया है।लोगों में लोकप्रिय हुआ अचारममता रानी ने लगभग दो वर्ष पहले तहसील रोड पर रेहड़ी लगाकर अचार बेचना शुरू किया था। ममता ने बताया कि शुरुआत में उन्हें इस बात की चिंता रहती थी कि ग्राहक आएंगे या नहीं, स्वाद पसंद आएगा या नहीं, लेकिन धीरे-धीरे उनके हाथ का बना खट्टा-मीठा, नींबू, मिर्च, मिक्स वेज और आंवला अचार ग्राहकों में इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग दूर-दूर से सिर्फ उनके अचार खरीदने पहुंचने लगे। देखते ही देखते ममता की रेहड़ी स्थानीय लोगों की पसंद बन गई।स्वयं सहायता समूह से मिली मजबूतीममता रानी स्वयं सहायता समूह से भी जुड़ी हुई हैं, जिसने उनके आत्मविश्वास और कामकाज दोनों को नई दिशा दी। समूह की बैठकों में उन्हें पैकिंग, क्वालिटी मेंटेनेंस, बजट मैनेजमेंट और बिक्री बढ़ाने की ट्रेनिंग मिली। इन सब का ही नतीजा है कि ममता ने स्थानीय कार्यक्रमों में स्टाल लगाने शुरू किए और वहां भी उनका अचार हाथों-हाथ बिकने लगा। मेले में या स्कूलों के कार्यक्रम या शहर के प्रमुख मेलजोल स्थान, ममता का स्टाल अब आकर्षण का केंद्र बन चुका है।घर संभालने के साथ बन रही आत्मनिर्भरकेवल अचार बेचना ही नहीं, बल्कि अपने घर की जिम्मेदारी उठाना भी ममता बखूबी निभा रही है। परिवार की आमदनी सीमित होने के कारण कई बार घर खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन आज उनकी मेहनत ने उस तंगी को खत्म कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के रोजमर्रा के खर्च तक, ममता अपनी कमाई से सब संभाल रही है। उनके पति भी अब उनके इस प्रयास पर गर्व महसूस करते हैं।वर्जन :घर से बाहर निकलने का साहस सबसे कठिन कदम था, लेकिन जैसे ही उन्होंने पहला कदम उठाया, रास्ते खुद-ब-खुद बनते चले गए। आज वह जिलेभर में अपनी अलग पहचान और सम्मान कमा रही है। महिलाएं अक्सर उनसे मिलने आती हैं और पूछती हैं कि उन्होंने इसकी शुरूआत कैसे की। यदि नीयत साफ हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो छोटा सा काम भी बड़ा मुकाम दिला सकता है। ममता रानी।
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