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वाटर टैंक में जितनी सप्लाई, उतनी ही आपूर्ति, जलघरों में नहीं हो रहा पानी का भंडारण

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जिले की नहरों में पानी पहुंचे पांच दिन हो गए हैं लेकिन शहर के अलावा गांवों के जलघर नहीं भरे जा सके हैं। नहरों में इस समय 510 क्यूसेक पानी चल रहा है जबकि 1000 हजार क्यूसेक की आवश्यकता है। ऐसे में जितना पानी रोजाना जलघर के टैंकों में पहुंच रहा है, उतना सप्लाई हो जाता है। ऐसे में नहरी पानी बंद होने से पहले सभी जलघर भरना किसी चुनौती से कम नहीं।
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गर्मी की शुरुआत में ही जिले में पेयजल संकट गहरा गया है। नहरों में पानी छोड़े पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जलघर पूरी तरह से नहीं भरे हैं। रामनगर जलघर में तीन दिन पानी छोड़ा गया, फिर बधवाना नहर को बंद कर दिया गया। अब लोहारू नहर में पानी छोड़ गया है। इसी नहर से शहर के चंपापुरी जलघर में पानी डाला जाता है। चंपापुरी जलघर में चार वाटर टैंक हैं, लेकिन एक भी पूरी तरह से नहीं भरा जा सका है। जो पानी जलघर में प्रतिदिन डाला जाता है वह अगले दिन सप्लाई हो जाता है। ऐसे में वाटर टैंकों में पानी स्टोरेज नहीं हो पा रहा है। अब 10 मार्च को नहरों में पानी बंद होने के बाद पेयजल संकट और गहराएगा, क्योंकि उसके बाद नहरी पानी की अगली बारी 24 दिन बाद आएगी। सिंचाई विभाग अधिकारियों का तर्क है कि विभाग ने 970 क्यूसेक पानी की डिमांड भेज रखी है, जबकि कम मात्रा में पानी आ रहा है। ऐसे में शहर को को प्राथमिकता दी जा रही है।
ग्रामीण इलाकों में खरीद रहे पानी
इस समय गांवों के सभी जलघर खाली पड़े हैं। नहरी पानी से ही गांवों के जलघर भरे जाते हैं। गांवों के लोग जैसे-तैसे टैंकर व ट्रैक्टर के जरिये पानी लाकर पूर्ति कर रहे हैं। बधवाना नहर के अधीन करीब 14 जलघर हैं, जो खाली पड़े हैं। इस नहर में पानी छोड़े जाने की सख्त जरूरत बनी हुई है।
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अगर नहरी पानी की मात्रा बढ़ जाती है तो बधवाना नहर में भी पानी छोड़ दिया जाएगा। इस समय लोहारू नहर के तहत आने वाले जलघरों में पानी डाला जा रहा है। पानी की 970 क्यूसेक की डिमांड भेज रखी है।
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-वेदपाल सिंह, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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