आजादी के मतवाले
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स्वतंत्रता सेनानी सुधनराम। स्रोत : परिजन
- बलकरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी ने नेताजी के आह्वान पर छोड़ी थी ब्रिटिश सेना की नौकरी, आजाद हिंद फौज से जुड़कर हुकूमत का किया डटकर मुकाबला
चरखी दादरी। गांव बलकरा निवासी स्वतंत्रता सेनानी सुधनराम देश की आजादी की लड़ाई के समय सात साल तक घर नहीं आए थे। परिजनों को भी उनकी कोई सूचना नहीं थी। परिजन जिंदा व मौत होने के भ्रम में थे। सुधनराम ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सेना में रहते हुए अंग्रेजी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर किया था। वह कई बार जेल गए। जेल में अनेक यातनाएं झेलीं, लेकिन, फिर भी हार नहीं मानी। उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत का साथियों संग डटकर मुकाबला किया।
स्वतंत्रता सेनानी सुधनराम का जन्म 28 जनवरी 1923 को हुआ था। उनके पिता नाहड़ सिंह व माता का नाम पतोरी देवी था। वह 28 अक्तूबर 1941 को ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए थे। बाद में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। आजाद हिंद फौज में शामिल होने के बाद उन्होंने सिंगापुर, कोहमा, मलयेशिया, रंगून व वर्मा में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
इस दौरान उनको कई बार जेल में डाला गया। सात साल बाद वह घर लौटे थे। घर आने के बाद उनकी शादी हुई। उनके चार पुत्र व तीन पुत्रियां हैं। इस दौरान उन्होंने फिर से भारतीय सेना में नौकरी की। 20 जून 1968 में भारतीय सेना से मेडिकल बोर्ड पेंशन में आ गए। संवाद
- तत्कालीन प्रधानमंत्री ने किया था सम्मानित
15 अगस्त 1972 को आजादी की 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ताम्रपत्र प्रदान कर सुधनराम को सम्मानित किया था। 9 मार्च 1992 को उनका निधन हो गया। देश की आजादी में सुधनराम का योगदान सदैव याद रखा जाएगा।