गांव आर्यनगर का बदहाल खेल स्टेडियम।
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बाढड़ा। गांव आर्यनगर के खेल स्टेडियम में वर्ष 2017-18 में स्वीकृत करीब 49 लाख के विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों और युवा खिलाड़ियों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि इतने बड़े बजट के बावजूद स्टेडियम में केवल चहारदीवारी का निर्माण किया गया जबकि खेल मैदान आज भी अपनी बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्ष 2017-18 में स्वीकृत 49 लाख रुपये की राशि के उपयोग की सीएम विंडो और उच्च अधिकारियों के माध्यम से निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि पूरा बजट खर्च हुआ है तो मैदान आज भी बदहाल क्यों है और खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं।
युवा खिलाड़ियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्टेडियम का समतलीकरण कर उसे खेलने योग्य नहीं बनाया गया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। गांव आर्यनगर के खेल स्टेडियम में मौजूद प्रदीप फोगाट, मोनू, अमित, सचिन, नीरज, राजेश, भूपेंद्र आदि युवाओं का कहना है कि गांव में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। युवा खिलाड़ियों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर वर्तमान ग्राम सरपंच से भी कई बार संपर्क किया और मैदान को खेलने योग्य बनाने की मांग रखी, लेकिन उन्हें कोई ठोस आश्वासन या सहयोग नहीं मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग और ठेकेदार द्वारा बजट पूरा खर्च होने का दावा किया जा रहा है लेकिन मौके पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। ग्रामीणों के अनुसार स्टेडियम के भीतर आज भी गहरी खाइयां, ऊंचे-ऊंचे मिट्टी के टीले और झाडिय़ां फैली हुई हैं। मैदान का समतलीकरण नहीं होने के कारण खिलाड़ी यहां अभ्यास करने में असमर्थ हैं। दौड़ना तो दूर, मैदान में सुरक्षित तरीके से चलना भी मुश्किल हो गया है।