चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग ने दादरी नागरिक अस्पताल में दिव्यांगों को ढाई साल पहले मेडिकल बोर्ड की सुविधा तो दे दी, लेकिन बोर्ड में पर्याप्त विशेषज्ञ तैनात नहीं किए। इसका खामियाजा दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने पहुंच रहे जिले के दिव्यांगों को भुगतना पड़ रहा है। विशेषज्ञ की राय लेने के लिए उन्हें भिवानी और रेवाड़ी नागरिक अस्पताल समेत रोहतक पीजीआई के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
दरअसल दादरी नागरिक अस्पताल में पहले दिव्यांगों के लिए मेडिकल बोर्ड की सुविधा नहीं थी और इसके चलते उन्हें दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए भिवानी जाना पड़ता था। दिव्यांगों की मांग पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने दादरी के जिला बनने के चार साल बाद दिव्यांग बोर्ड की सुविधा शुरू की थी और ढाई साल का लंबा समय बीतने के बाद भी बोर्ड में सभी विशेषज्ञ शामिल नहीं हो पाए हैं।
बुधवार को पड़ताल में सामने आया कि सुविधा शुरू होने के बाद से लेकर अब तक करीब 7000 पहुंचे हैं और इनमें से करीब 2200 को अन्य विशेषज्ञों की राय लेने के लिए दूसरे जिलों में स्थित अस्पतालों की खाक छाननी पड़ी है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुछ विशेषज्ञों की तैनाती न होने से दिव्यांगों के साथ उनके तीमारदारों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बोर्ड में चाहिए ये विशेषज्ञ
दिव्यांगों का मेडिकल करने के लिए हड्डी रोग, ईएनटी, चर्म रोग, गाइनी, बालरोग, नेफ्रो या न्यूरो सर्जन, फिजिशियन, सर्जन व मनोवैज्ञानिक आदि विशेषज्ञों की जरूरत होती है। दादरी जिले की बात करें तो फिजिशियन, सर्जन, न्यूरो या नेफ्रो सर्जन और मनोवैज्ञानिक की तैनाती नहीं है। इनकी राय लेने के लिए ही दिव्यांग दूसरे जिलों में जाने को विवश हैं।
अब 5 दिन मिल रही सुविधा
नागरिक अस्पताल के नए भवन में दिव्यांगों के मेडिकल करने के लिए बोर्ड का गठन किया गया है। पहले सप्ताह में एक दिन यह सुविधा थी, जिसे बाद में दो दिन और फिर पांच दिन किया गया। प्रतिदिन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कैंप में करीब 100 से 120 दिव्यांग पहुंचते हैं। इनमें से करीब 40 से अधिक दिव्यांग प्रतिदिन दूसरे जिलों में रेफर किए जाते हैं।
दिव्यांग बोले- नागरिक अस्पताल में ही की जाए व्यवस्था
नागरिक अस्पताल पहुंचे दिव्यांग सुनील, पूजा, प्रवीन और दिनेश का कहना है कि जब बोर्ड को दादरी नागरिक अस्पताल में बैठाया गया है तो इसमें सभी विशेषज्ञ भी शामिल करने चाहिए। दिव्यांग और तीमारदार को दूसरे जिलों में जाकर विशेषज्ञ की राय लेने में बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। विभाग को जल्द से जल्द यहां पर विशेषज्ञों की तैनाती करनी चाहिए।
कुछ विशेषज्ञों की कमी है और इसके चलते मजबूरीवश दिव्यांगों को दूसरे जिले में रेफर करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मांग हम मुख्यालय से कर चुके हैं और आचार संहिता हटने के बाद तैनाती होने की उम्मीद है। इसके बाद दिव्यांगों को दूसरे जिला के अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा।
डॉ. राज वीरेंद्र मलिक, कार्यवाहक सीएमओ