मानसून सीजन में बारिश का दौर लगातार जारी है। दिल्ली रोड पर बनाए गए एसटीपी (सीवर ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्थाएं गड़बड़ाई हुई हैं। पांच एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के जीर्णोद्घार और स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की इस समय दरकार है। इस समय स्टोरेज क्षमता कम होने से एक मोटर से ही यहां पानी का उठान हो पा रहा है। एसटीपी के तीन में से दो शैंप जर्जर होने के चलते वर्किंग में नहीं हैं। शहर की मुख्य सीवर लाइनों (24 व 40 इंची) से पर्याप्त पानी का उठान न होने से विभिन्न वार्डों में सीवर लाइनें बैक मार रही हैं। सड़कों पर दूषित पानी और गंदगी जमा होने से लोग बेहद परेशान हैं।
गत कांग्रेस सरकार में दिल्ली रोड पर समसपुर गांव के समीप पांच एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया गया था। इस एसटीपी से शहर की करीब 60 फीसदी सीवर व्यवस्था जुड़ी हुई है। शहर का दूसरा एसटीपी रामनगर रोड पर है और इससे शहर का 40 फीसदी भाग जुड़ा है। समसपुर एसटीपी की क्षमता अब कम पड़ने लगी है। सीवर लाइनों से उठाए गए पानी को आगे भेजने का कोई प्रबंध नहीं है और इसके चलते पानी को कच्चे टैंक बनाकर स्टोर किया जा रहा है। इस समय दोनों बड़े कच्चे टैंक सीवर के पानी से लबालब हैं और ओवरफ्लो के कगार पर हैं। मानसून सीजन में अगर एक दिन में 50 एमएम से उपर बारिश होती है तो फिर यहां व्यवस्थाएं पूरी तरह गड़बड़ा जाएंगी। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग यहां प्रबंध दुरुस्त करता अभी नजर नहीं आ रहा।
एसटीपी के अलावा शहर का सीवर सिस्टम भी ठप पड़ा है, जिसके चलते बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को भी है, लेकिन विभाग में अधिकारियों की कमी और एसटीपी से जुड़े प्रपोजल को हेड ऑफिस से मंजूूरी न मिलने के चलते समाधान की दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाए जा रहे। विभागीय नजरअंदाजी और प्रशासनिक ढिलाई के चलते इस समय पूरा शहर सीवर समस्या झेलने को विवश है।
चारों मोटरें हैं ठीक, 30 एचपी की एक मोटर से ही हो रहा उठान
समसपुर एसटीपी में सीवर लाइनों से पानी उठान के लिए चार मोटरें लगाई गई हैं। दो मोटरें 60-60 हॉर्स पॉवर की हैं, जबकि दो 30-30 हॉर्स पॉवर की हैं। अगर चारों मोटरों को एकसाथ चला दिया जाए तो एसटीपी सीवर लाइनों के पानी का दबाव नहीं झेल पाएगा। इसके चलते विभाग पिछले लंबे समय से एक 30 हॉर्स पॉवर की मोटर से ही पानी का उठान कर रहा है। 30 हॉर्स पॉवर की छोटी मोटर एक घंटे में 1.44 लाख लीटर का पानी उठान करती है। जबकि 60 हॉर्स पॉवर की मोटर एक घंटे में 2.88 लाख लीटर पानी का उठान करती है।
क्या होता है शैंप
एसटीपी में तीन शैंप हैं, जिनमें से दो पुराने होने के चलते जर्जर हो चुके हैं। इस समय एक ही शैंप वर्किंग में है। शैंप कुएं के आकार में होता है और लाइनों से पानी उठान के लिए इसमें मोटर लगी होती है। लाइनों से पानी उठान के बाद शैंप से पानी टैंकों में डाला जाता है, ताकि पानी को साफ किया जा सके।
एसटीपी से आगे पानी निकासी का प्रपोजल ठंडे बस्ते में
जन स्वास्थ्य विभाग के पास एसटीपी से आगे पानी भेजने का प्रबंध नहीं है। इसके लिए ड्रेन नंबर आठ तक पाइपलाइन डालने का प्रपोजल तैयार किया गया था। करीब दो साल तक यह ठंडे बस्ते में रहा और इसके बाद सरकार ने इसे रद्द कर दिया। इसके बाद विभाग ने यहां एक और बड़ा टैंक बनाने का प्रपोजल तैयार किया। लेकिन इस पर भी अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
ये हैं शहर से पानी निकासी के प्रबंध
शहर से बारिश के पानी की निकासी के लिए विभाग ने अलग-अलग जगहों पर मोटरें लगाई हुई हैं। एसटीपी इस समय हॉट लाइन से कनेक्ट नहीं है और यहां 24 घंटे में पांच से छह बार बिजली गुल होती है। बिजली कटों की समयावधि पांच मिनट से दो घंटे तक रहती है। विभाग ने पानी की निकासी के लिए शहर के घिकाड़ा मोड़ पर 50 एसएसपी की एक मोटर, सीसीआई में 40 और 20 एसएसपी की दो मोटर और 25 एसएसपी की एक मोटर सरदार झाडू सिंह चौक पर लगा रखी है। जन स्वास्थ्य विभाग के जेई मनोज रोहिल्ला ने कहा कि शहर की 40 इंची सीवर लाइन की सफाई हम करवा रहे हैं। 24 इंची लाइन से पानी का उठान किया जा रहा है। एसटीपी की क्षमता कम होने से भी समस्या बनी हुई है। फिर भी जैसे-तैसे व्यवस्था कर हम काम चला रहे हैं।