जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय में धरने पर बैठे कर्मचारी नारेबाजी करते हुए।
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जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सीवर मैन और मोटर ऑपरेटरों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला है। इसके चलते 32 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। शुक्रवार को उन्होंने जन स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने नारेबाजी कर रोष जाहिर किया। वहीं, 32 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सीवर लाइनों की ब्लॉकेज खोलने का काम प्रभावित रहा। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि शुक्रवार को शहर में जेटिंग मशीन के जरिए ब्लॉकेज खोली गई।
पिछले तीन माह का तीन लाख 12 हजार रुपये वेतनमान अटकने से 16 सीवर मैन और 16 मोटर ऑपरेटर शुक्रवार से हड़ताल पर चले गए। शहर में सीवर व्यवस्था पहले ही ठप है और कर्मचारियों की हड़ताल से हालात और खराब हो सकते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि तीन माह से वेतन न मिलने कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब है। वेतन न मिलने के कारण वे बच्चों की फीस, राशन और दूध की उधारी तक नहीं चुकता कर पा रहे हैं। लोगों ने अब उन्हें उधार देना भी बंद कर दिया है। जेई और एक्सईएन से वे कई बार मिल चुकेे हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। कर्मचारियों ने बताया कि 16 सीवर मैन का एक लाख 74 हजार चार सौ रुपये और 16 मोटर ऑपरेटरों का एक लाख 37 हजार 600 रुपये वेतन बकाया है।
जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी वेतन न मिलने पर एक माह पहले 12 से 24 अगस्त तक हड़ताल पर रहे थे। तब एक्सईएन ने एक सप्ताह में सभी कर्मचारियों का वेतन खाते में डलवाने का आश्वासन देकर हड़ताल खत्म कराई थी। कर्मचारियों का कहना है कि अब तक उन्हें वेतन नहीं मिला है और इसके चलते उन्हें हड़ताल करनी पड़ रही है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का कहना है कि सीवर मैन व मोटर ऑपरेटरों के वेतन के भुगतान के लिए फाइल उच्चाधिकारियों के पास भेजी जा चुकी है। जल्द ही वेतनमान उनके खातों में डाल दिया जाएगा। इधर, सहायक सचिव अमित नरवाल का कहना है कि कर्मचारियों के पूरे कागजात उनके पास अभी नहीं आए हैं। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कर्मचारियों के खातों में वेतनमान डाला जाएगा।