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गांव में स्क्रीनिंग: 3500 ग्रामीणों के करवाए रैपिड टेस्ट, 46 संक्रमित मिले

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चरखी दादरी। जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण और मौतों के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। दो दिन दिन में टीमें 77 हजार ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर चुकी हैं। इनमें से साढ़े तीन हजार के रैपिड और 2200 के आरअीपीसीआर टेस्ट करवाए गए हैं। इनमें 46 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इन्हें विभाग ने तत्काल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में या फिर होम आइसोलेट कर दिया है। जो 46 लोग पॉजिटिव मिले हैं, वो छुपे केस हैं और ऐसे ही केस ढूंढने के मकसद से जिला प्रशासन ने जिले के गांवों में यह सर्वे शुरू करवाया है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा कोरोना संक्रमित मिलने पर एक सप्ताह पहले डीसी सभी ग्रामीणों की स्क्रीनिंग के आदेश दिए थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 172 टीमें गठित की थीं। एक टीम में चार कर्मचारियों को शामिल किया गया है। 17 मई को हीविभाग ने अपनी सभी टीमें फील्ड में उतारी थीं। दो दिन में इन टीमों ने करीब 24 हजार घरों को कवर किया है। इसके तहत करीब 77 हजार ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई।
स्क्रीनिंग के दौरान जिन ग्रामीणों में लक्षण पाए गए, उनके आरटीपीसीआर और रेपिड टेस्ट करवाए गए। रेपिड टेस्ट में 46 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। नोडल अधिकारी ने बताया कि 46 में से 18 संक्रमितों को होम आइसोलेट जबकि 28 को कोविड सेंटर या अन्य अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है।
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88402 घरों को कवर करना है लक्ष्य
जिला स्वास्थ्य विभाग केवल ग्रामीण क्षेत्रों में ही घर घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रहा है। विभाग को 88402 घर और 327855 लोगों को कवर करना है। फिलहाल करीब 32 हजार घर और ढाई लाख की आबादी पेंडिंग हैं। नोडल अधिकारी के अनुसार एक सप्ताह के अंदर सर्वे पूरा हो जाएगा।
खांसी, बुखार, जुकाम आदि के मिले लक्षण
सर्वे के नोडल अधिकारी डॉक्टर अभिमन्यु ने बताया कि पांच सौ से अधिक लोगों में खांसी जुकाम, बुखार, सांस लेने में तकलीफ आदि के लक्षण मिले हैं। उन्हें आवश्यक हिदायतें देने के साथ दवाएं भी दी गई हैं। उन्हें खुद को आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूसरे लोग उनके संपर्क में न आने पाएं। टीम घर में जाकर परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य जांच रही है।
पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा डाटा
इस सर्वे का डाटा टीमें पोर्टल पर अपलोड भी कर रही हैं। इससे उन ग्रामीण क्षेत्रों की पहचान आसानी से हो सकेगी, जहां कोरोना का प्रकोप अधिक है। प्रत्येक गांव के लिए एक टीम गठित की गई। स्वास्थ्य जांच के दौरान अगर किसी ग्रामीण में लक्षण मिलते हैं तो उसे तुरंत सीएचसी या पीएचसी पर भेजकर कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल दिलवाया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण बढ़ने के चलते ही प्रशासन ने गांवों के लोगों की स्क्रीनिंग करवाने का फैसला लिया है। इससे छिपे कोरोना केस पकड़ में भी आ रहे हैं।
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राजेश जोगपाल, डीसी।
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