प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों की तर्ज पर दादरी सिविल अस्पताल में भी आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) सुविधा मुहैया कराने की कवायद शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की अनुशंसा पर पीडब्ल्यूडी ने इसका प्रपोजल तैयार किया है, जिसके मुताबिक भवन निर्माण पर करीब 120 लाख रुपये खर्च होंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय भेजने के लिए काउंटर साइन कर प्रपोजल पीडब्ल्यूडी को वापिस भेज दिया है। नई बिल्डिंग के पास ही जगह चिह्नित की गई है। आईसीयू तैयार होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को पीजीआई रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय रहते जिला अस्पताल में ही उपचार मिल जाएगा। इसके अलावा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को भी इससे फायदा होगा।
जिला सिविल अस्पताल में पर करीब साढ़े पांच लाख की आबादी निर्भर है। जिले में सिविल अस्पताल के अलावा एक मातृ शिशु अस्पताल, तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 14 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं में अभी काफी सुधार की दरकार है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार की जरूरत है। इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने अब इंटेंसिंग केयर यूनिट तैयार कराने की योजना तैयार की है। इसका प्रपोजल तैयार करने के लिए पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा गया था।
पीडब्ल्यूडी ने नई बिल्डिंग के समीप की जगह को दी हरी झंडी
डिप्टी सीएमओ संजय गुप्ता ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की टीम ने अस्पताल परिसर में चिह्नित जगह का निरीक्षण किया जो नई यूनिट के लिहाज से उपयुक्त लगी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने प्रपोजल तैयार किया है और इसके अनुसार ब्लॉक निर्माण पर करीब 120 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
एक माह में औसतन 400 मरीज होते हैं रेफर
जिला अस्पताल से एक माह में औसतन 400 मरीज रेफर होते हैं। सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले करीब 150 लोगों को रेफर किया जाता है। आईसीयू शुरू होने के बाद जिला अस्पताल का रेफर रेट भी नीचे लुढ़केगा। सड़क दुर्घटनाओं के अलावा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इन परिस्थितियों के मरीजों को पड़ती है आईसीयू की जरूरत
अगर कोई गंभीर बीमारी से ग्रस्त है और उसे गहन व करीबी निगरानी की आवश्यकता है, जिनकी बड़ी सर्जरी हुई है और उन्हें नियमित उपचार की दरकार है तो उन्हें आईसीयू में रखा जाता है। गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को भी आईसीयू की जरूरत होती है। किसी गंभीर संक्रमण से ग्रस्त होने पर आईसीयू की जरूरत होती है।
कैसे रखा जाता है मरीज को आईसीयू में
आईसीयू में भर्ती मरीज की देखभाल एक टीम नियमित करती है। एक या दो रोगियों पर एक नर्स की तैनाती होती है। आईसीयम में वेंटिलेटर की व्यवस्था भी होती है। रोगी की स्थिति पर हर पल नजर रखी जाती है।
अस्पताल में हैं नौ वेंटिलेटर
जब मरीज को श्वास संबंधी समस्या हो तो उस स्थिति में भी आईसीयू की जरूरत होगी। आईसीयू में वेंटिलेटर भी होता है और सकारात्मक बात यह है कि इस समय जिला अस्पताल में नौ वेंटिलेटर हैं।
प्राइवेट में 10 से 50 हजार आता है एक दिन का खर्च
इस समय सिविल अस्पताल में गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए उपचार की सुविधा नहीं है। ऐसे में तीमारदारों को मरीजों के साथ प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो आईसीयू में मरीज भर्ती होने पर प्रतिदिन का औसतन 10 से 50 हजार तक खर्च आता है।
पीडब्ल्यूडी ने प्रपोजल तैयार कर हमारे पास भेजा था। मैंने काउंटर साइन कर प्रपोजल पीडब्ल्यूडी के पास भेज दिया है। पीडब्ल्यूडी इस प्रपोजल को मुख्यालय भेजेगी। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द आईसीयू की सुविधा जिला अस्पताल में मुहैया करवा दें।
- डॉ. मंजू कादयान, सीएमओ, चरखी दादरी