कन्या गुरुकुल के वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में संस्कृत विश्वविद्यालय के उपकुलपति श्रैयांश ?
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संस्कृत भरत की प्राचीन भाषा ही नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों एवं महापुरुषों का विश्व को दिया गया अनमोल रत्न है। केंद्र व प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य गीता व संस्कृत भाषा के ज्ञान को घर- घर तक पहुंचना है। कन्या गुरुकुल से संस्कार युक्त शिक्षित छात्राएं माडर्न समाज में अनमोल हीरे के समान ज्ञान का प्रचार करेंगी।
यह बात संस्कृत विश्वविद्यालय के उपकुलपति श्रैयांश द्विवेदी ने कन्या गुरुकुल पंचगांव के वार्षिकोत्सव समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा कोई जटिल नहीं है, लेकिन हमारी आधुनिकता की मानसिकता ने हमें अंग्रेजी हाव-भाव का गुलाम बना दिया है। हमें अपने बच्चों को पश्चिमी सभ्यता से दूर रखते हुए महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। गोशाला प्रबंधक समिति अध्यक्ष विजय पंचगांव ने कहा कि कन्या गुरुकुल की स्थापना महाशय मंसाराम व राजा महताब सिंह जैसे महापुरुषों के प्रयासों से हुई है।
समापन कार्यक्रम में कन्या गुरुकुल प्रबंधन समिति अध्यक्ष ओमप्रकाश पंचगांव व गुरुकुल उपकुलपति सुनीता गुप्ता के पुत्र विरेंद्र गुप्ता ने कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि और अतिथिगण को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर सहायक श्रमायुक्त चंद्रपाल श्योराण, कन्या गुरुकुल प्रबंधन समिति अध्यक्ष ओमप्रकाश पंचगांव, एटीओ कश्मीर सिंह, गोशाला कादमा अध्यक्ष सतबीर शर्मा, मंडल अध्यक्ष हनुमान शर्मा, मनफूल सिंह आर्य, सुमेर सिंह जांगड़ा, सरपंच राजेश, राजेंद्र सिंह, तहसीलदार मुकेश कुमार, आनंद शास्त्री, रामकिशन हड़ौदी व मास्टर हरि सिंह गोपी आदि मौजूद थे।