भिवानी। सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद की जयंती पर उनके पौत्र विष्णु दत्त ने पौराणिक सांग किचक वध का मंचन किया। हरियाणा कला परिषद के सहयोग से यह कार्यक्रम गांव बापोड़ा में आयोजित किया गया।
इस सांग में महाभारत काल का वर्णन किया। बताया कि कौरव और पांडवों में जुआ खेला गया। उसमें पांडव हार गए। उनको 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास दिया गया। वनवास अवधि पूरी होने पर पांचों पांडव सलाह करते हैं कि एक साल के अज्ञातवास को कहा गुजारें क्योंकि अगर इस अज्ञातवास में अगर कौरव उन्हें तलाश कर लेते हैं तो दोबारा 12 साल का वनवास हो जाएगा।
दोबारा वनवास से बचने के लिए पांचों भाई निर्णय लेते हैं कि मत्स्य देश में राजा कमल नैन के यहां वेश बदल कर समय बिताया जाए। पांचों पांडव राजा के यहां भिन्न भिन्न रूप धारण कर द्रोपदी सारंधरी बन रानी की दासी के रूप में रहने लग जाते हैं। राजा कमल नैन का साला किचक बहुत बलशाली होता है। राजा राज्य उसकी ताकत से चलता है।
एक दिन किचक अपनी बहन सुदेशन के महलों में आता है और दासी के वेश में द्रोपदी को देख लेता है और अपनी बहन से पूछता बहन ये आपके महल में औरत कौन है। तब सुदेशन बताती कि भाई ये मेरी नई दासी है। किचक द्रोपदी के रूप पर मोहित हो जाता है और अपनी बहन से कहता है कि बहन आप इतनी सुंदर दासी रखे हुए हो और तेरे सभी भाई अविवाहित हैं। तू इसको मेरे महलों में भेज। नहीं तो मैं तेरे राज्य को बर्बाद कर दूंगा।
सुदेशना डर के मारे द्रोपदी को किचक के यहां भेज देती है। किचक द्रोपदी को कई लोभ, लालच देता है कि तू मेरी रानी बन तो मैं तेरे सब ठाठ कर दूंगा। किसी तरह द्रोपदी किचक से बचकर अपने पांचों पतियों को बताती है कि किचक मुझे रानी बनाना चाहता है।
द्रोपदी की बात सुन भीम बड़े गुस्से में भर जाते हैं। आगे किचक और भीम का द्वंद्व युद्ध होता है और भीम किचक का वध कर देते हैं। कार्यक्रम के समापन पर हरियाणवी रागनी प्रतियोगिता होगी। इसमें नरेंद्र डांगी, सुरेंद्र गिगनाऊ, संदीप भैंसवाल, अनिल बड्या जनक और नरेश बापोड़ा भी भाग लेंगे।