चरखी दादरी। पंजाब रोडवेज कर्मचारियों पर हुए लाठीचार्ज और मारपीट की घटना के विरोध में सोमवार को दादरी बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों ने साझा मोर्चा के बैनर तले पंजाब के कर्मचारियों के समर्थन में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने दो घंटे तक धरना देकर पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और रोष प्रकट किया।
डिपो प्रधान राजेश ने कहा कि पंजाब में पिछले तीन दिनों से पनबस, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के कर्मचारी आंदोलन पर हैं जिसके चलते वहां चक्का जाम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले पंजाब सरकार ने निजीकरण रोकने और नई सरकारी बसें खरीदने का वादा किया था, लेकिन अब सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है। राजेश ने कहा कि वर्तमान में पंजाब के पास लगभग 2500 बसों का बेड़ा है, जिनमें से अधिकांश जर्जर हालत में हैं, जबकि राज्य को कम से कम 10 हजार बसों की आवश्यकता है। इसके बावजूद सरकार नई बसें खरीदने के बजाय किलोमीटर स्कीम लागू करने की तैयारी कर रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
सर्व कर्मचारी संघ से डिपो प्रधान सुनील फौजी, महासंघ के डिपो प्रधान राजेश मकड़ानी और इंटक यूनियन के डिपो प्रधान अरविंद्र ने पंजाब सरकार की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। राजेश मकड़ानी ने बताया कि रविवार को पंजाब सरकार और कर्मचारी नेताओं के बीच 7 घंटे लंबी मैराथन बैठक हुई, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं निकला। सरकार ने केवल मौखिक आश्वासन दिए और कोई लिखित सहमति जारी नहीं की। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि बैठक के बाद रात में पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के कर्मचारी नेताओं को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया, जिसे उन्होंने सरकार का तानाशाही रवैया बताया।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पंजाब में कर्मचारियों पर की गई बर्बरतापूर्ण कार्रवाई बिल्कुल अस्वीकार्य है और यह कर्मचारियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। दादरी के रोडवेज कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि वे अपने पंजाब के साथियों के साथ मजबूती से खड़े हैं और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।