किसान आंदोलन का असर परिवहन विभाग पर भी पड़ रहा है। दिल्ली रूट पर एक सप्ताह से बस सेवा बंद होने से जहां एक ओर डिपो को करीब 21 लाख का नुकसान हो चुका है। वहीं दूसरी ओर यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दादरी डिपो के बेडे़ में 105 बसें शामिल हैं। इनमें से आमतौर पर 95 बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ती हैं। सामान्य दिनों में डिपो को एक दिन में औसतन 15 लाख की आमदनी होती है। इसमें से 20 फीसदी आमदनी अकेले दिल्ली रूट से होती है। दिल्ली रूट पर डिपो की 12 बसें 24 फेरे लगाती हैं। सुबह पांच से लेकर देर शाम तक दादरी बस स्टैंड से दिल्ली की बस सर्विस है। राजधानी से जिले की जड़ाव ठीक है और दोनों के बीच की वाया सड़क दूरी करीब 105 किलोमीटर है।
दिल्ली के लिए बस से रोजाना करीब डेढ़ हजार लोग करते है यात्रा
किसान आंदोलन के चलते एक सप्ताह से दिल्ली रूट पर बसें नहीं भेजी जा रही हैं। दिल्ली रूट पर सामान्य दिनों में जिले से करीब चार हजार लोग सफर करते हैं। इनमें वाया ट्रेन से करीब ढाई हजार, जबकि बस से डेढ़ हजार यात्री यात्रा करते हैं। दिल्ली रूट पर बस सेवा बंद होने से यात्री परेशान हैं। इस समय दिल्ली जाने के लिए लोगों को अपने वाहन लेकर ही या फिर किराये की गाड़ी लेकर कूच करनी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक चपत भी लग रही है। वहीं, दिल्ली रूट पर बस सेवा बंद होने से रोडवेज विभाग को भी राजस्व का घाटा हो रहा है।
यूं लगा है 21 लाख का फटका
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार 12 बसें एक दिन में 24 फेरे लगाती हैं। एक बस दो फेरों में 25 हजार की कमाई देती है। इस लिहाज से 12 बसों के संचालन से प्रतिदिन तीन लाख रुपये राजस्व के रूप में प्राप्त होते हैं। पिछले एक सप्ताह से बस सेवा बंद है और इस लिहाज से 21 लाख का फटका डिपो को लग चुका है।
आठ माह से ट्रेनें भी हैं बंद
राजधानी दिल्ली की तरफ प्रतिदिन सफर करने वाले लोगों में से अधिकतर ट्रेन में सफर करना पसंद करते हैं। पिछले करीब आठ माह से ट्रेन सेवा बंद है और इसके चलते दैनिक यात्री बेहद परेशान हैं। ट्रेन के बाद बस सेवा का विकल्प बंद होने से व्यापारी वर्ग भी परेशान है।
पिछले एक सप्ताह से किसान आंदोलन के चलते दिल्ली रूट पर बस सेवा बंद है। प्रतिदिन 12 बसें दिल्ली रूट पर 24 फेरे लगाती हैं। स्थिति सामान्य होने और उच्चाधिकारियों के आदेशों के बाद ही दिल्ली रूट पर बस सेवा बहाल की जाएगी।
रण सिंह, डीआई, दादरी डिपो