शहर में पेयजल सप्लाई के लिए पहुंचा आरओ प्लांट संचालक का वाहन।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। जिले में शुद्ध पेयजल के नाम पर तेजी से फैल रहे आरओ पानी के कारोबार की हकीकत अब सवालों के घेरे में है। शहर से लेकर गांवों तक हजारों परिवार रोजाना जिस आरओ पानी को सुरक्षित समझकर खरीद रहे हैं, उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच और प्लांटों की वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लाखों रुपये के इस कारोबार पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से लोगों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि कई आरओ प्लांट आवश्यक मानकों और अनुमति प्रक्रिया का पालन किए बिना संचालित हो रहे हैं जबकि संबंधित विभागों की ओर से भी नियमित निरीक्षण नहीं किए जा रहे।
हर दिन डेढ़ लाख रुपये का कारोबार
जिले में करीब 25 आरओ प्लांट संचालित हैं। इन प्लांटों से प्रतिदिन लगभग 1.50 लाख लीटर पानी की आपूर्ति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही है। यदि एक कैंपर में 12 लीटर पानी भरा जाए तो प्रतिदिन करीब 12,500 कैंपर लोगों तक पहुंच रहे हैं। बाजार में एक कैंपर की कीमत 12 से 15 रुपये होने से जिलेवासी हर दिन करीब 1.50 से 1.80 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं। इस हिसाब से हर महीने लगभग 36 लाख रुपये से अधिक का कारोबार केवल आरओ पानी के माध्यम से हो रहा है।
आरओ प्लांट की हो जांच : जिला नगर व्यापार मंडल के उपप्रधान संदीप फोगाट, कारोबारी राजेश कुमार और प्रदीप सिंह का कहना है कि लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करता। उनका कहना है कि जिला प्रशासन को विशेष अभियान चलाकर सभी आरओ प्लांटों की गुणवत्ता, लाइसेंस और पानी के नमूनों की जांच करानी चाहिए। जो प्लांट निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।