पिछले छह माह से नगर परिषद की बैठक न होने से शहर में विकास की योजनाएं ठप है। शहर के वार्डों में समस्याओं का अंबार पर नगर परिषद विकास कार्यों का खाका खींचने के लिए गंभीर नहीं हैं। बारिश के बाद शहर की 20 सड़कें और गलियां चलने लायक नहीं हैं । नए सिरे से इनके निर्माण की दरकार है जबकि 21 वार्डों में 50 से अधिक गलियां कच्ची हैं। पार्षद जल्द से जल्द नगर परिषद की बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं वहीं, चेयरमैन का कहना है कि दस दिन के भीतर बैठक की तारीख तय कर दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि शहरी विकास को लेकर नगर परिषद की अंतिम बैठक 19 फरवरी को हुई थी। यह बैठक काफी हंगामेदार रही और देरी से पहुंचने वाले पार्षदों ने हस्ताक्षर न कराने पर खूब हंगामा किया। इसी बैठक के बाद चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 14 पार्षदों ने उपायुक्त को शपथ पत्र सौंपे थे। जिसके बाद चेयरमैन संजय छपारिया हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। पार्षदों ने स्टे हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। 23 सितंबर को इस मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इसी कानूनी बखेड़े के चलते फरवरी के बाद से ही नगर परिषद की बैठक आयोजित नहीं की गई है। जिससे शहर की विकास योजनाओं पर असर पड़ रहा है।
हालांकि पिछली बैठकों में पास हो चुके कई प्रस्तावों पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। शहर की सड़कों और गलियों की हालत बहुत खराब है। इनके निर्माण का प्रस्ताव पास कर जल्द कार्य शुरू कराने की आवश्यकता है लेकिन अब तक नगर परिषद की बैठक को लेकर तारीख तय नहीं है। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि चेयरमैन संजय छपारिया का कहना है कि अगले दस दिन के अंदर बैठक की तारीख तय कर जल्द बैठक बुलाई जाएगाी।
इन परियोजनाओं का इंतजार हुआ लंबा
1- कम्यूनिटी सेंटर: करीब पांच करोड़ से शहर का पहला कम्यूनिटी सेंटर निर्माण प्रस्तावित है। नगर परिषद को कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण करवाना है। इसकी घोषणा मुख्यमंत्री ने सितंबर 2016 में की थी। कम्यूनिटी सेंटर निर्माण के बाद जहां नगर परिषद की इनकम बढ़ेगी तो वहीं शहर के लोगों को भी मांगलिक कार्यक्रम के लिए सस्ते में जगह मुहैया हो जाएगी। कम्यूनिटी सेंटर निर्माण से 80 हजार की आबादी को लाभ मिलेगा।
2- श्यामसर तालाब: शहर के करीब 400 साल पुराने श्यामसर तालाब को पर्यटनस्थल का लुक दिया जाना है। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने ही इसकी घोषणा की थी। चार साल से यह प्रोजेक्ट कागजों में ही उलझा हुआ है और अब नगर परिषद इसका प्रपोजल नए सिरे से तैयार करेगी। तालाब के जीर्णोद्घार के बाद शहर को अलग लुक मिलेगा। पहले 37 करोड़ का प्रपोजल तैयार किया गया था। सामाजिक संगठन कई बार यह मांग भी कर चुके हैं।
3- पार्क निर्माण: शहर की 80 हजार की आबादी केवल रोज गार्डन पर निर्भर है। वार्ड-17 में पीएनबी के पीछे एक करोड़ से हरियाणा स्वर्ण जयंती योजना के तहत पार्क बनाया जाना है। चार साल बाद भी शहर के प्रस्तावित दूसरे बड़े पार्क का निर्माण नहीं हो पाया है। वार्ड-18 में निर्माणाधीन पार्क का निर्माण कार्य भी अधर में लटका है। दो नए पार्कों की सौगात मिलने से शहर के लोगों को काफी फायदा होगा और नप को जल्द ये प्रोजेक्ट सिरे चढ़ाने चाहिए।
पार्षद बोले: भ्रष्टाचार का बोलबाला, चहेतों का विकास
- नगर परिषद में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और चहेते पार्षदों के वार्डों में ही विकास को तवज्जो दी जाती है। वार्डवासी समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा।
-वीरेंद्र पप्पू, पार्षद, वार्ड-19
- वार्ड में विकास कार्यों की दरकार हैं। कई सड़कें और गलियां कंडम हो चुकी हैं और उनके नए सिरे से निर्माण की दरकार है। नगर परिषद अधिकारियों का बैठक की तरफ ध्यान नहीं है।
-सुमन देवी, पार्षद, वार्ड-17
- शहरी विकास के लिए बैठक बुलाई जानी बेहद जरूरी है। पहले की बैठक में पास हो चुके प्रस्तावों पर अब तक काम शुरू नहीं हुआ है और इसका जवाब भी हमें चेयरमैन व अधिकारियों से लेना है।
-दीपक श्योराण, वाइच चेयरमैन, नगर परिषद
- अंतिम बैठक फरवरी माह में आयोजित हुई थी। करीब छह माह बीत चुके हैं और जल्द ही बैठक बुलाई जानी चाहिए ताकि पार्षद अपने वार्डों की समस्याएं रखकर समाधान करवा सकें।
-महेश गुप्ता, पार्षद, वार्ड-2
15 अगस्त के बाद तय कर देंगे बैठक की तारीख : छापरिया
कोरोना के चलते बैठक की तारीख तय नहीं कर पाए। जल्द से जल्द बैठक बुलाई जाएगी और 15 अगस्त के बाद हम तारीख तय कर देंगे। भ्रष्टाचार के आरोप बेबुनियाद हैं।
- संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद।