चरखी दादरी नागरिक अस्पताल भवन, जिसकी मरम्मत की दरकार है। संवाद
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दादरी नागरिक अस्पताल भवन के खंभे से टूटकर गिरा मलबा। संवाद
- करीब तीन माह पहले जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय भेजा था एक करोड़ का एस्टीमेट, अब तक काम की स्वीकृति मिली न बजट
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी नागरिक अस्पताल के बीमार भवन के उपचार में देरी हो रही है। दूसरी ओर हर रोज अस्पताल भवन के खंभों से मलबा टूटकर गिर रहा है। दीवारों में आईं दरारें बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल भवन की मरम्मत के लिए करीब एक करोड़ का बजट खर्च होगा। इस कार्य के लिए मुख्यालय से स्वीकृति व बजट दोनों मिलने का इंतजार है।
दादरी नागरिक अस्पताल भवन के निर्माण पर 9.86 करोड़ रुपये लागत आई थी। भाजपा सरकार ने पहले कार्यकाल में अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया था। पिछले करीब सवा दो साल से अस्पताल भवन क्षतिग्रस्त है। लंबा समय बीतने के बाद भी अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया था। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए 20 नवंबर के संस्करण में नागरिक अस्पताल भवन बीमार, अधिकारी नहीं कर रहे उपचार...नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
इसके बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने लोक निर्माण विभाग को भवन निरीक्षण कर एस्टीमेट तैयार करने का रिमाइंडर भेजा। फिर 4 दिसंबर को लोक निर्माण विभाग के दो जेई की अगुवाई में टीम क्षतिग्रस्त भवन का जायजा लेने पहुंची। इसके बाद टीम ने करीब एक करोड़ का भवन मरम्मत एस्टीमेट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपा था। स्थानीय अधिकारियों ने एस्टीमेट मुख्यालय भेजकर बजट की मांग की थी। अब तक बजट जारी नहीं हुआ है। इससे मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
- ये होंगे काम
अस्पताल भवन के चारों तरफ बने खंभे क्षतिग्रस्त हैं। इन सबकी मरम्मत होगी। इसके अलावा, दीवारों को दुरुस्त किया जाएगा। प्रथम तल के कमरों में आईं दरारें खत्म की जाएंगी। क्षतिग्रस्त रेलिंग भी बदली जाएंगी।
- 1,000 से अधिक रहती है दैनिक ओपीडी
इन दिनों सिविल अस्पताल की ओपीडी 20 प्रतिशत बढ़ी हुई है। प्रतिदिन 1,000 से ज्यादा मरीज यहां पहुंच रहे हैं। इनमें 150 से अधिक मरीज प्रतिदिन एक्स-रे भी करवाते हैं। वहीं, प्रतिदिन इमरजेंसी कक्ष में पांच से सात केस आते हैं। भवन क्षतिग्रस्त होने के चलते यहां हादसों का अंदेशा बना है।
वर्सन:
अस्पताल भवन की मरम्मत का काम जल्द कराया जाएगा। इसके लिए एस्टीमेट तैयार कराया जा चुका है। साथ ही उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत करवा चुके हैं।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग