गांव दगड़ौली में खेत में किसान से बातचीत करते स्वामी सच्चिदानंद। स्रोत : संगठन
- सर्वहित साधना न्याय और आर्यवीर दल की ओर से दगड़ौली में चलाया गया प्राकृतिक कृषि प्रेरणा अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
झोझूकलां। धरती आज संकट में है। आधुनिक कृषि पद्धतियों और रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता को क्षीण कर दिया है। इसे पुनर्जीवित करने का एकमात्र उपाय प्राकृतिक कृषि है। यह पंचतत्वों के संतुलन पर आधारित है। हे बातें स्वामी सच्चिदानंद ने सर्वहित साधना न्यास एवं आर्यवीर दल चरखी दादरी के सदस्यों के साथ प्राकृतिक कृषि प्रेरणा अभियान के तहत गांव दगड़ौली के किसानों से खेतों में जाकर चर्चा के दौरान कहीं।
इस अवसर पर गांव में प्राकृतिक खेती कर रहे कृषक जयभगवान के साथ बातचीत की। बिना रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के प्रयोग के प्राकृतिक रूप से तैयार की गई गेहूं की देसी किस्म 306, 711, एमपी गोल्ड, सोना मोती की मिश्रित खेती एवं खेत की मिट्टी व तैयार गोबर की खाद की जानकारी ली। इस अवसर पर कृषक जयभगवान ने बताया कि उन्होंने गेहूं में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए प्राकृतिक रूप से तैयार गाय के गोबर की खाद के साथ-साथ नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए गेहूं में चने, मेथी एवं धनिए की भी हल्की बिजाई की।
स्वामी सच्चिदानंद ने कहा कि भूमि संरक्षण के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक उपायों को अपनाकर हम अपनी धरती को पुनः समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील है कि वे समाज के कल्याण के लिए प्राकृतिक खेती करें। प्राकृतिक खेती की विधियों से विभिन्न प्रकार की फसलों में होने वाली बीमारियों को भी रोका जा सकता है। प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लाभदायक और टिकाऊ विकल्प है। इस अवसर पर रामकुमार आर्य, भूपेंद्र आर्य, रविंद्र, जयभगवान, महेंद्र, सोनू आदि की उपस्थिति रही।