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17 हजार की आबादी वाले रानीला गांव में ज्यादा बार राजपूत समुदाय और साहू गोत्र के पास रही है सरपंची

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गांव रानीला स्थित जैन मंदिर। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। करीब 18 हजार की आबादी वाले रानीला गांव में ज्यादातर राजपूत समुदाय व साहू गोत्र के पास सरपंची रही है। इस गांव में 7408 मतदाता हैं और इस लिहाज से यह जिले के बड़े गांवों की सूची में शामिल है। आबादी व मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने के लिहाज से गांव राजनीतिक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है। गांव में दो बार बार महिला सरपंच रही हैं, जो कि सामान्य वर्ग से थी। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग ने भी एक बार गांव की सरपंची की कमान संभाली है। इस बार सरपंच पद के चुनाव में फिलहाल तक चार उम्मीदवार मैदान में हैं। सरपंच पद इस बार सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है।
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रानीला की बात करें तो 20 वार्ड हैं। गांव में 4010 पुरुष और 3398 महिला मतदाता हैं। अतिशय क्षेत्र के नाम से जाने वाला गांव धार्मिक दृष्टि से भी देशभर में प्रसिद्ध है। गांव में भगवान आदिनाथ का जैन मंदिर है। यहां हर वर्ष उत्सव में देश भर के विभिन्न महानगरों से जैन समाज के लोग पूजा करने आते हैं। गांव में वैश्य समुदाय के लोगों की संख्या भी काफी है। हालांकि यह गांव साहू गोत्र बाहुल्य है। जाट समुदाय के तीन हजार से ज्यादा वोट हैं। इसी प्रकार राजपूत समुदाय के मतदाताओं की संख्या करीब 1500 है। गांव में ब्राह्मण समुदाय के करीब 600 वोट हैं।
ग्रामीणों के अनुसार मौजूदा सरपंच चुनाव में उम्मीदवारों के समक्ष पेयजल का मुद्दा हावी रहेगा। गांव में जलघर है लेकिन वाटर टैंक नहीं भरे जा रहे हैं। नहर से जलघर तक पानी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रबंध नहीं है। ज्यादा आबादी होने की वजह से पानी की खपत अधिक है। ऐसे में पेयजल व्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार की जरूरत है। इसी प्रकार गांव से दादरी, रोहतक व भिवानी के लिए रोडवेज बस सेवा का सीधे तौर पर जुड़ाव नहीं हैं जिससे लोगों को सांजरवास गांव जाकर बसें पकड़नी पड़ती है।
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- 1952 में सर्वसम्मति से रामधारी वैद्य बने थे सरपंच
अब तक चार बार राजपूत समुदाय ने गांव की चौधर की है। ग्रामीणों के अनुसार सन 1952 में सर्वसम्मति से रामधारी वैद्य सरपंच चुने गए थे। कुछ समय बाद रामधारी ने अपने व्यक्तिगत कारणों के चलते त्याग पत्र दे दिया था। उसके बाद कलिराम को सर्वसम्मति से सरपंच बनाया गया। इसके बाद मीर सिंह राठी ने सरपंची की। तत्पश्चात राजपूत समुदाय से राजपाल सिंह व महा सिंह सरपंच बने। इसके बाद मीर सिंह साहू ने गांव की चौधर की। एक बार फिर राजपूत समुदाय से रघुबीर सरपंच चुने गए।
- लगातार दो योजना ब्राह्मण समाज के पास रही चौधर
लगातार दो योजना ब्राह्मण समुदाय के हाथ चौधर रही। इस समुदाय से पंडित हरिकिशन व रामअवतार शर्मा गांव के सरपंच रहे। रिटायर्ड पीटीआई होशियार सिंह साहू भी एक योजना सरपंच रहे। उसके बाद बलवंत साहू सरपंच बने। अनुसूचित जाति वर्ग से सुरेश कुमार ने सरपंची की। ऋषि साहू ने भी गांव की चौधर की। इसके बाद दो बार महिलाओं ने सरपंची की। सूबेदार विजय राजपूत की पत्नी व साहू गोत्र से एक महिला गांव की सरपंच रही।
- गांव का सामाजिक अनुशासन है बढ़िया
गांव निवासी रिटायर्ड जिला शिक्षा अधिकारी एवं प्राथमिक शिक्षा के उपनिदेशक जंगजीत साहू का कहना है कि गांव में चार पाने हैं। गांव में सामाजिक अनुशासन बढ़िया है। लोगों में आपसी सद्भावना व समरसता है जबकि भाईचारा भी अच्छा है। गांव में चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न होते रहे हैं।
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