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ड्रोन से लिया गया दादरी शहर का फोटो। संवाद
- अक्तूबर माह तक दुरुस्त हो जाएगा पूरा रिकाॅर्ड, इस समय 7 हजार से ज्यादा हैं त्रुटियां, ठीक करने में जुटे कर्मचारी
जगवीर शर्मा
चरखी दादरी। राजस्व विभाग ने पूरे शहर की जमीन के रिकाॅर्ड को 15 जून से ऑफलाइन कर दिया है। अब विभाग रिकाॅर्ड में व्याप्त खामियों को दूर करेगा। उसके बाद रिकॉर्ड ऑनलाइन होने की संभावना है। वहीं, 15 जून से पहले सारी प्रक्रिया ऑनलाइन चल रही थी।
वहीं, त्रुटियों को दुरुस्त करने तक कोई भी जमीन मालिक न तो अपना नाम परिवर्तन करवा सकेगा और न ही जमीन का तबादला आदि करवा सकेगा। दाखिला खारिज का काम भी नहीं होगा। जमीन की खरीद-फरोख्त होती रहेगी। इस समय जमाबंदी में करीब सात हजार खामियां एवं त्रुटियां हैं। इससे लोगों को जमीन खरीद-फरोख्त करने व अन्य कार्यों में दिक्कत आ रही है। जमाबंदी में त्रुटियों की वजह से आए दिन लोगों को पटवारी व तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
वर्ष 2019 में जब से जमीन का रिकाॅर्ड ऑनलाइन किया गया है, तब से जिला में 5000 लोगों को अपनी जमीन की जमाबंदी में त्रुटियां ठीक करवानी पड़ी हैं। ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकाॅर्ड ही अपलोड कर दिया गया। उसके बाद के रिकाॅर्ड को अपडेट नहीं किया गया। जमाबंदी तैयार करते समय भी पुराना रिकाॅर्ड उठा लिया गया। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां एवं खामियां रह गईं।
- 4500 लोग जेब ढीली कर ठीक करवा चुके त्रुटियां
खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ रहा है। पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। अब तक ऐसे में 4500 लोग अपने जमीन के रिकाॅर्ड को ठीक करवा चुके हैं। आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। उसके बाद तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं और फिर ये ऑनलाइन अपलोड होती है। तब जाकर जमाबंदी का रिकाॅर्ड ठीक हो पाता है।
- प्रतिदिन होती हैं करीब 25 रजिस्ट्री
तहसीलदार कार्यालय में प्रतिदिन करीब 25 जमीन एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकाॅर्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में नहीं हैं।
- यह काम बंद होने से लोगों को आ रहीं दिक्कतें
किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आ रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका है क्योंकि ऑनलाइन रिकाॅर्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं, जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकाॅर्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को आए दिन कृषि व राजस्व विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
वर्सन
गत 15 जून से राजस्व विभाग ने शहर के जमीन रिकाॅर्ड को ऑफलाइन कर दिया है। इस दौरान किसी प्रकार की म्यूटेशन नहीं की जा सकेगी। अक्तूबर माह तक जमाबंदी की सारी खामियां दूर कर दी जाएंगी। इसके लिए अधिकारी व कर्मचारी में जुटे हैं। नई जमाबंदी तैयार हो जाने के बाद बदर लिखवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-सज्जन कुमार, तत्कालीन तहसीलदार, राजस्व विभाग