संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। विद्यार्थियों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने व सुरक्षित जगह मानते हुए अटल भू जल योजना के तहत जिला में 49 राजकीय स्कूलों सेटेलाइट से कनेक्ट वर्षा मापी यंत्र लगा दिए गए हैं। ये यंत्र सैटेलाइट से कनेक्ट हैं। जैसे ही बारिश होती है, डाटा हेड ऑफिस पहुंच जाता है।
जिन क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर काफी नीचे हैं उन क्षेत्रों के स्कूलों में यह यंत्र लगाए गए हैे। घटते भूमिगत जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधीन भू-जल शाखा इस दिशा में काम कर रही है। जिले का गिरता भूमिगत जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। हर साल मानसून सीजन में बारिश कम होने की वजह से वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है बल्कि लेवल नीचे जा रहा है। नहरों का पानी 50 प्रतिशत सिंचाई में इस्तेमाल हो रहा है। अब तो केवल जलघरों से ही पेयजल आपूर्ति एक विकल्प बचा है। गांवों में पुराने जमाने के बने कुएं, सरोसर अपना अस्तित्व खोने जा रहे हैं। तालाब दूषित पानी की झील बनते जा रहे हैं।
ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में विभाग प्रयास कर रहा है। इसके लिए आम आदमी को भी जागरूक होने की जरूरत है। मानसून सीजन में बारिश के पानी का संग्रहण करने की आज जरूरत महसूस हो रही है। प्रशासन व विभाग पानी की बचत के लिए आए दिन पॉलिसी तैयार कर रहा है। इसके तहत जिले के 49 गांवों में राजकीय स्कूल कि परिसरों मेें वर्षा मापी यंत्र लगा दिए गए हैंं, जो सैटेलाइट से कनेक्ट हैं। इससे बारिश होने पर स्वत: एमएम का आंकड़ा मिल जाएगा। इसके साथ-साथ उस क्षेत्र में जल संरक्षण की दिशा में काम किया जाएगा। वर्षा मापी यंत्र के लिए स्कूल परिसर में बोरिंग किया गया है जिसमें यह यंत्र फिट किया गया है। विभाग ने स्कूल परिसर को सेफ जगह माना है इसके लिए चयन किया गया है।
इन स्कूलों में लगे यंत्र
राजकीय स्कूल बेरला, राजकीय स्कूल डांडमा, काकड़ोली, डालावास, लाडावास, उमरवास, डोहका, हंसावास, भांडवा, जेवली, कालूवाला,नीमड़ बडेसरा, नांधा, गोपी, पंचगावां, हुई व मांढ़ी सहित 49 स्कूल शामिल हैं।
विभाग ने स्कूल परिसर को यह यंत्र लगाने के लिए सेफ जगह माना है। जिला में 49 स्कूलों में वर्षा मापी यंत्र लगा दिए हैं जो सेटेलाइट से कनेक्ट किए गए हैं जिससे बारिश होने पर तत्काल रिकार्ड हो जाएगा। पानी की बचत के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है। - खुर्शीद अहमद , सूचना शिक्षा संचार विशेषज्ञ भू-जल