चरखी दादरी। जिले के 30 जलघरों के मीडिया फिल्टर खराब पड़े है और इसका सीधे तौर पर असर पानी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। आलम यह है कि इन जलघरों से पानी उपचारित किए बिना ही घरों में सप्लाई किया जा रहा है। इस पानी के सेवन का असर स्वास्थ्य पर पड़ना लाजिमी है। इनमें से कुछ जलघर तो ऐसे हैं जिनका निर्माण होने के बाद से ही मरम्मत तक नहीं हुई है। वहीं, जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जलघरों की मरम्मत कराने के साथ फिल्टर मीडिया भी दुरुस्त करवा दिए जाएंगे।
जिले के ज्यादातर गांवों में बोरिंग ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति की जाती है और वहां लो प्रेशर आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। जिला भर में करीब 210 बोरिंग ट्यूबवेल से विभाग सप्लाई कर रहा है। वैसे ही शहर व गांवों में एक दिन छोड़कर पेयजल की सलाई हो रही है। जिले के अधिकतर क्षेत्र में जमीनी पानी खारा होने की वजह से हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं।
गांवों व शहर में पेयजल लाइनों में पानी का प्रेशर काफी कम बना हुआ है। गर्मी में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं। पानी की खपत डेढ़ गुना तक बढ़ जाती है लेकिन पानी की आपूर्ति एवं क्षमता बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नगर में बाहरी एवं नई कॉलोनियों में पानी का प्रेशर काफी कम होने की वजह से लोगों को ज्यादा परेशानी बनी रहती है। कई बार तो बिजली मोटर से भी पानी का उठान नहीं हो पाता।
अधिकतर गांवों में जलघरों में फिल्टर सिस्टम जवाब दे चुके हैं। इस समय बिना फिल्टर किए पेयजल की सप्लाई की जा रही है। यह पानी पीने लायक नहीं है। लोगों को अपने स्तर पर पेयजल की व्यवस्था करनी पड़ रही है। आरओ केंद्रों से पीने का पानी खरीदने को विवश हैं। जिले के सभी जलघरों को मरम्मत की दरकार है। इनकी मोटरें नई तकनीक की लगाए जाने की जरूरत है। इस समय जो मोटरें लगा रखी हैं वे जवाब दे चुकी हैं। इनकी पानी उठान की क्षमता 50 प्रतिशत तक भी नहीं रही जिससे लाइनों में प्रेशर नहीं बन पा रहा है। ऐसे में अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता।
- आबादी के साथ बढ़े अवैध पेयजल कनेक्शन
शहर ही नहीं जिला भर की आबादी एवं दायरा लगातार बढ़ रहा है। नगर में मकानों की संख्या भी हर साल करीब 600 तक बढ़ जाती है। इन नए मकानों में भी हर साल पेयजल कनेक्शन बढ़ रहे हैं। इस समय शहर में करीब 15 हजार पेयजल कनेक्शन हैं। गांवों में करीब 25 हजार वैध कनेक्शन हैं।
ग्रामीण बोले: जलघरों की हालत खराब, सुध ले विभाग
गांव अचीना के पूर्व सरपंच प्रेम सिंह, गांव सरुपगढ़ निवासी पहलवान सुनील कुमार, गांव रासीवास निवासी संजीव कुमार व गांव समसपुर निवासी बिजेंद्र ने बताया कि जलघरों की हालत बेहद खराब हुई है। जनस्वास्थ्य विभाग को इनकी मरम्मत कर नई तकनीक की मोटरें लगानी चाहिए। यहां नए फिल्टर सिस्टम लगाने चाहिए, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके।
- स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं ऐसे पानी का सेवन
स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मानें तो उपचारित किए बिन ही नहरों के पानी का सीधा सेवन करना स्वास्थ्य के लिहाज से सही नहीं है। इससे पेट और चर्म रोग समेत विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने का भय बना रहता है। अगर घरों में ऐसा पानी आता है तो उसे पीने से पहले अवश्य उबाल लें।
विभाग जिला भर में 30 जलघरों की मरम्मत करवाएगा। जल जीवन मिशन योजना के तहत इस पर काम किया जाना है। हर घर तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। 1.60 लाख मीटर नई पेयजल लाइन भी बिछाई जानी है।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग