प्रदेश सरकार एक ओर तो ऑनलाइन सिस्टम पर जोर दे रही है। दूसरी ओर पर्याप्त संसाधन व सुविधाओं के अभाव में किसानों को दर-दर भटकने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण की अंतिम तारीख 31 जुलाई निर्धारित की गई है। लेकिन क्षेत्र के छह गांवों के किसानों का पंजीकरण नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। रविवार को किसानों ने इसे लेकर अपना आक्रोश जाहिर किया।
खरीफ की फसलों का ब्योरा सरकार ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज कराने के लिए 31 जुलाई तय कर रखी है। गांव सांजरवास, फौगाट, सांवड़, हिंडोल, लांबा व कोहलावास गांवों के किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होने के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। किसान मदन परमार, चमनलाल, ब्रजपाल, जयपाल सिंह, तेजा सिंह, महाबीर डालण, मैनपाल, महेंद्र सिंह, लीलाराम, कुकी, मान सिंह और मास्टर सतपाल सिंह ने बताया कि जब से मेरी फसल मेरा-ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण आरंभ हुआ है, तब से ही कोई किसान फसल का ब्योरा पोर्टल पर दर्ज नहीं करवा पाया है। इस बारे में कृषि विभाग के कर्मचारियों को भी अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। फसल का पंजीकरण कराने के लिए तीन दिन ही शेष रह गए हैं।
कृषि अधिकारियों को करवा चुके अवगत : प्रदेश सचिव किसान मोर्चा
इस बारे में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा प्रदेश सचिव सतीश शर्मा ने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर छह गांवों के किसानों का पंजीकरण नहीं होने की शिकायत कृषि विभाग के एडीओ और मार्केट कमेटी सचिव को भी अवगत करवा चुके हैं। लेकिन अभी तक समाधान नहीं होने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। अभी तक एक भी किसान का पंजीकरण नहीं हो सका है।
अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं : मार्केट कमेटी सचिव
मार्केट कमेटी सचिव बसंत कुमार ने बताया कि इन गांवों की समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर अवगत करवाया जा चुका है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल ऑनलाइन होने के चलते इसमें कोई भी तकनीकी कमी को दूर करने के लिए संबंधित विभाग ही कार्रवाई कर सकता है।