ग्राउंड रिपोर्ट
-मातृ-शिशु अस्पताल में सुविधाओं की कमी, बिजली जाने पर नहीं हो पाते हैं कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में लिफ्ट काम कर रही है न जेनरेटर। प्यास बुझाने के लिए वाटर कूलर के फिल्टर भी लंबे समय से खराब पड़े हैं।
इन समस्याओं के कारण मरीजों और उनके परिजनों में रोष है। अस्पताल की लिफ्ट पिछले तीन महीनों से बंद है। इससे मरीजों को दूसरी और तीसरी मंजिल पर स्थित लेबर रूम, अल्ट्रासाउंड कक्ष, डेंगू जांच लैब और डायलिसिस केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति अत्यंत तकलीफदायक बन गई है।
बिजली जाने की स्थिति में काम चलाने के लिए अस्पताल में लगा जेनरेटर भी खराब पड़ा है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर न तो अल्ट्रासाउंड हो पाता है और न ही अन्य उपचारात्मक सेवाएं सुचारु रूप से चल पाती हैं। इससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। वहीं, पीने के पानी के लिए लगाए गए वाटर कूलर के फिल्टर खराब होने से स्वच्छ पानी की उपलब्धता नहीं हो पा रही है।
उपचार के लिए अस्पताल में आए मरीजों का कहना है कि भले ही प्रबंधन मरीजों को अव्वल दर्जे की सुविधाएं देने का दम भरता हो लेकिन यहां की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मरीजों ने चिकित्सा अधिकारियों से मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की है।
हर रोज 300 से अधिक मरीज आते हैं उपचार के लिए
एमसीएच में महिला विशेषज्ञ चिकित्सक ओपीडी शुरू होने व जच्चा-बच्चा वार्ड के शिफ्ट होने के बाद मरीजों की संख्या में दुगना इजाफा हुआ है। अस्पताल में सामान्य ओपीडी के अलावा गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण सहित प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
तीन माह से खराब पड़ी है लिफ्ट
हर बारिश के सीजन में लिफ्ट के निचले भाग में जलभराव हो जाता है। इस कारण इसमें करंट आने की आशंका को देखते हुए इसको बंद करना पड़ता है। ऐसे में जच्चा-बच्चा वार्ड में जाने वाली गर्भवती को सीढि़यों के सहारे पहली मंजिल पर जाना पड़ता है। वहीं, डायलिसिस करवाने के लिए आने वाले मरीजों को दूसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट की सुविधा नहीं मिल पाती है।
10 दिन में लिफ्ट ठीक करवाने का हुआ था दावा
एमसीएच में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को पहली व दूसरी मंजिल तक पहुंचने में होने वाली परेशानी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से 11 लाख रुपये खर्च कर लिफ्ट लगवाई गई थी। एक सितंबर को पीडब्ल्यूडी की इलेक्ट्रानिक्स शाखा के अधिकारियों ने 10 दिन में अंडरग्राउंड भाग को वाटरप्रूफ व पानी से खराब हुए उपकरणों को बदलवाकर लिफ्ट को चालू करवाने के दावे किए थे। इस दावे को एक माह गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस कारण रोजाना 100 से अधिक मरीजों को सीढि़यों के सहारे उपचार कक्ष तक पहुंचना पड़ रहा है।
मरीजों ने बयां की पीड़ा
पिछले तीन माह से लिफ्ट खराब पड़ी है। हर रोज डायलिसिस के लिए 10 से अधिक मरीजों को तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए सीढि़यों का सहारा लेना पड़ रहा है। लंबा समय गुजर जाने के बाद भी यह ठीक नहीं हो पाई है।
-मोहित मरीज, गांव झिंझर
अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं, बुजुर्गों को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए किस्तों में जाना पड़ रहा है। इसके अलावा, डेंगू टेस्ट व जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आने वाले लोगों के लिए भी सीढि़यां ही सहारा हैं।
-संदीप, गांव भागवी
वर्सन:
लिफ्ट के अंडरग्राउंंड भाग में चव्वा आने से पानी की मात्रा कम नहीं हो पाई है। इसलिए काम में देरी हो रही है। मंगलवार या बुधवार को साइट देखने के बाद ही स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो पाएगी।
-अनूप सिंह, जेई, पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रीशियन शाखा
फोटो 27 : एमसीएच में सीढि़यों के सहारे तीसरी मंजिल की ओर जाते मरीज। संवाद
फोटो 28 : एमसीएच में रखा वाटर कूलर, जिसमें फिल्टर नहीं लगा है। संवाद
फोटो 29 : एमसीएच में बंद पड़ी लिफ्ट। संवाद
फोटो 30 : मोहित
फोटो 31 : संदीप