निरीक्षण के दौरान टीम को यहां 25 भारतीय और 19 विदेशी प्रजातियों के पक्षी मिले। टीम सदस्यों ने बताया कि अधिकतर विदेशी प्रजातियां यूरोप और एशिया के देशों की मिली हैं। पक्षी विशेषज्ञ टीके रॉय ने बताया कि यूरेशियन स्पूनबिल, ब्लैक हैडिड और पेटेंट स्टार्क नामक प्रजातियों के पक्षी लगातार विलुप्त होते जा रहे हैं। इनका संरक्षण करने के लिए भारत सरकार की और से कानून भी बनाए गए हैं। इन प्रजातियों के पक्षी विशेष संरक्षण पार्कों में ही पाए जाते हैं।
बिरहीकलां के पंच राजबीर सिंह जांगड़ा ने बताया कि जनवरी माह के दौरान यहां अनेक प्रकार के पक्षियों का जमावड़ा बना रहता है। अब मौसम साफ होने के चलते अधिकतर विदेशी पक्षी यहां से चले गए हैं। अगर टीम पहले यहां आती तो और अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां मिलते। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस जमीन पर नेशनल पार्क बनाने की मांग की है।
ये अधिकारी पहुंचे निरीक्षण करने
बिरहीकलां क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए वन्य प्राणी संरक्षण प्रभारी सोनू कुमार, पवन कुमार, वन विभाग रेंज अधिकारी हेमंत पारिक,उप निरीक्षक मनजीत कुमार, जैव विविधता कॉर्डिनेटर बतीता श्योराण ने पक्षी संरक्षण के लिए नमीयुक्त जमीन का निरीक्षण किया।
एक माह में भेजी जाएगी रिपोर्ट
जिला जैव विविधता कॉर्डिनेटर बबीता श्योण ने बताया कि गांव बिरहीकलां में मिले देशी व विदेशी पक्षियों और यहां के वातारण की रिपोर्ट तैयार कर एक माह के अंदर वन्य जीव संरक्षण विभाग के पास भेजी जाएगी, ताकि विभाग के अधिकारी आगामी प्रक्रिया अमल में ला सके।