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किसान आतमहत्या मामला: धरना संयोजक समिति और धरनास्थल पर मौजूद किसानों पर केस दर्ज

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दातोली निवासी किसान दलबीर के आत्महत्या मामले में झोझूकलां थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धरना संयोजक समिति और धरनास्थल पर मौजूद किसानों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है। थाना प्रभारी अनूप सिंह ने बताया कि दलबीर की मौत से पहले की जो वीडियो सामने आई है उसकी जांच कर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि वीडियो की जांच के दौरान सामने आया कि धरना संयोजक समिति ने अपने निजी स्वार्थ के चलते सल्फास निगलने के बाद दलबीर को समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया। उधर, धरना संयोजक विनोद मौड़ी का कहना है कि दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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गौरतलब है कि गांव दातोली निवासी दलबीर सिंह ने बुधवार सुबह रामनगर धरनास्थल पर पहुंचकर सल्फास निगल लिया था। दलबीर धरने से करीब 30 कदम दूर स्थित ट्यूबवेल पर नहाने की बात कहकर गया था और वापस धरनास्थल पर लौटने के बाद उसने सल्फास निगलने की बात किसानों को बताई। दलबीर को उपचार के लिए सिविल अस्पताल लाया गया था, लेकिन गंभीर हालत के चलते प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद उसे रोहतक पीजीआई रेफर किया गया था। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने वीरवार को रोहतक पीजीआई में मृतक का पोस्टमार्टम करवाया था और इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई की थी। इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई पर झोझूकलां थाना प्रभारी अनूप सिंह का कहना था कि दलबीर की मौत से पहले की जो वीडियो सामने आई है, उसकी जांच की जाएगी और उसी अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। वीरवार को ही पुलिस ने वीडियो की जांच की और इसके बाद धरना संयोजक समिति और घटना के समय धरनास्थल पर मौजूद किसानों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया।
इन कारणों से दर्ज किया गया मुकदमा
झोझूकलां थाने में दर्ज मुकदमे में धरना संयोजक समिति पर अपनी स्वार्थों के चलते दलबीर को सल्फास निगलने के बाद समय से अस्पताल नहीं पहुंचाने का आरोप हैं। मुकदमे के अनुसार दलबीर के सल्फास निगलने के बाद वहां मौजूद लोग उसकी वीडियो बनाते रहे। जबकि उसे समय से अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।
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पुलिस विभाग के कर्मचारी भी थे वहां मौजूद : विनोद मौड़ी
रामनगर धरना संयोजक समिति के सदस्य विनोद मौड़ी ने बताया कि बुधवार को हुई घटना के समय पुलिस विभाग के दो कर्मचारी भी वहां मौजूद थे। उन्होंने भी घटनाक्रम की वीडियो बनाई थी। हमने 15 मिनट के अंदर दलबीर को सिविल अस्पताल पहुंचा दिया था। गत पांच सितंबर को जिला प्रशासन व सरकार को पत्र लिखा था कि परेशान किसान कोई भी कदम उठा सकते हैं, लेकिन इसके बाद भी जिला प्रशासन या सरकार का नुमाइंदा किसानों के बीच पत्र लिखने का कारण जानने और मौजूदा स्थिति की जानकारी लेने नहीं पहुंचा। जिला प्रशासन ने दबाव बनाने के उद्देश्य से मुकदमा दर्ज कराया है।
वीडियो की जांच के बाद दर्ज किया गया मामला : एसएचओ
झोझूकलां थाना प्रभारी अनूप सिंह ने बताया कि दलबीर के सल्फास निगलने के बाद धरनास्थल पर बनाई गई वीडियो की जांच पुलिस ने कर ली है। वीडियो में पाया गया कि निजी स्वार्थ के चलते धरना संयोजक समिति व वहां मौजूद किसानों ने दलबीर को समय से सिविल अस्पताल नहीं पहुंचाया। अगर उसे समय से अस्पताल ले जाया जाता तो यह अप्रिय घटना नहीं होती। वीडियो की जांच के बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है।
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