डॉ. मनोज शास्त्री बलाली।
चरखी दादरी। फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या आज मंगलवार को शास्त्र सम्मत है। अमावस्या पर पितरों की प्रसन्नता के लिए विविध प्रकार से पूजन, यज्ञ, जप, तीर्थ स्नान करने का विधान है। फाल्गुनी भौमवती अमावस्या पर सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, ऐसे में लोग निश्चिंत होकर पितृ पूजन कर सकते हैं। मंगलवार के दिन अमावस्या होने से यह और भी अच्छा संयोग बनता है, क्योंकि मंगल को भूमि का वार कहा गया है और पितृ देव मनुष्य योनि पूरी करके देव रूप में स्थान प्राप्त करते हैं। इसलिए भूमि वार होने से पितरों का भू-लोक पर आगमन होना ऐसा पौराणिक प्रमाण प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि मंगलवार को अमावस्या के दिन भारत में कोई सूर्य ग्रहण नहीं है। दूर के देशों में सूर्य ग्रहण होगा, इसलिए हमें किसी प्रकार के सूतक पातक या सावधानी रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि हर महीने की अमावस्या अपने आप में श्रेष्ठ होती है। लेकिन फाल्गुन में जो अमावस्या आती है, इस दिन तीर्थ पर किया गया स्नान, पिंडदान, तीर्थ स्नान अनंत पुण्य को प्रदान करता है। शिव वास होने से इस दिन भगवान शिव का विशेष रुद्राभिषेक आदि भी किया जा सकता है और पितरों की प्रसन्नता के लिए गोदान, विप्र भोजन, हवन, तर्पण आदि निर्विघ्न रूप से कर सकते हैं। जरूरतमंद को दान भी कर सकते हैं।
डॉ. मनोज शास्त्री बलाली ने बताया कि मंगलवारी अमावस्या को अन्नदान भूमि दान श्रेष्ठ बतलाया है। प्रातः काल स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर, सभी बर्तनों को अच्छे से मिट्टी या राख से साफ कर भोजन बनाना चाहिए। उसके बाद पितरों को भोग लगाकर अपने बड़ों को भोजन करना चाहिए। विशेष कामना के लिए इस दिन हनुमान मंदिर में सुंदरकांड का पाठ करें या शिव मंदिर में दूध, रुई, घी और कपूर का दान करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश इनमें से कोई भी काम ना कर पाएं तो एक पेड़ जरूर लगाएं। जिससे पर्यावरण की रक्षा होगी और यश में वृद्धि होगी।