चरखी दादरी। विभिन्न मांगों को पूरा करवाने के लिए जिले के पटवारी और कानूनगो बुधवार को हड़ताल पर रहे। इस कारण करीब दो हजार लोगों के काम अटक गए और उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। वहीं पटवारियों और कानूनगो ने कोर्ट परिसर के गेट के पास बुधवार से तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया। हड़ताल के कारण वीरवार और शुक्रवार को भी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
वेतनमान की खामियों को दूर करवाने के लिए जिले के 49 पटवारी और 10 कानूनगो ने बुधवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार ने उनकी मुख्य मांगों को पहले मान तो लिया गया था, लेकिन वेतनमान बढ़ाने की मांग वर्ष 2023 से लागू की है जबकि एसोसिएशन वर्ष 2016 से इसे लागू करने की मांग कर रही है।
एसोसिएशन के बैनर तले हड़ताल में शामिल पटवारी और कानूनगो ने कोर्ट परिसर गेट के पास बनी पार्किंग के सामने सुबह नौ से शाम पांच बजे तक धरना दिया। उनके सीट न संभालने के कारण पटवारखाना में जमीन संबंधी कार्य बंद रहे। पटवारी और कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान कुलबीर सांगवान ने बताया कि सरकार को एसोसिएशन की मांग जल्द मानते हुए बढ़ाए गए वेतनमान का लाभ वर्ष 2016 से देना चाहिए।
- हड़ताल के चलते यह कार्य रहे प्रभावित
पटवारियों व कानूनगो की हड़ताल के कारण दो हजार लोग जरूरी काम नहीं करवा पाए। एसोसिएशन के प्रधान कुलबीर सिंह ने बताया कि सभी पटवारियों के पास रोज औसतन 400 आवेदन रिहायशी प्रमाणपत्र के लिए, 500 आवेदन जमाबंदी के, 450 आवेदन जन्म प्रमाणपत्र के और 500 आवेदन इंतकाल संबंधी आते हैं। इन सभी को परेशानी का सामना करना पड़ा।
- दिसबंर 2022 में भी की गई थी हड़ताल
अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए पटवारी और कानूनगो 26 दिसंबर 2022 से चार जनवरी 2023 तक कलम छोड़ हड़ताल पर रहे थे। लगातार 10 दिनों तक चली पटवारियों की हड़ताल के बाद सरकार ने पटवारियों की कुछ मांगें मानी तो वह काम पर लौट आए थे। अब उन्होंने दोबारा से हड़ताल कर दी है।
- धरनास्थल पर ये रहे मौजूद
जिला प्रधान कुलबीर सांगवान, उपप्रधान रविंद्र कुमार, बाढड़ा के प्रधान रामभगत, पटवारी संजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, अनिल कुमार, राजेश कुमार, पवन फौगाट, प्रतीक जांघू आदि धरनास्थल पर मौजूद रहे। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया।
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चरखी दादरी में कोर्ट परिसर के बाहर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर धरने पर बैठे पटवारी और कानूनगो। संवाद