ओवरलोडिंग मंथली मामला इन दिनों प्रदेश में सुर्खियां में है। इसके बावजूद चरखी दादरी जिले में ओवरलोडिंग धड़ल्ले से जारी है। एसआईटी की चार्जशीट में आईएएस लॉबी के नाम उजागर होने पर अंदरखाने जांच और तेज कर दी गई है। चरखी दादरी जिले का अतिरिक्त कार्यभार चार जिलों के आरटीए के पास है और रोटेशन में उनके कार्रवाई करने पर हालात नहीं सुधर रहे हैं। ऐसे में ओवरलोड वाहनों को माइनिंग जोन में ही रोकने की प्लान को सरकार से मंजूरी मिलने की इंतजार है। चरखी दादरी जिला प्रशासन ने पूरे प्रदेश में ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के लिए इन्हें माइनिंग जोन में भी रोकने की योजना तैयार कर प्रपोजल सरकार को भेजा था। यह योजना प्रदेश सरकार के पाले में है और अभी इसे मंजूरी मिलने का इंतजार है। प्लान की खास बात यह है कि माइनिंग जोन से ही ओवरलोड वाहनों को न निकलने देने और क्रेशर संचालक पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े ओवरलोडिंग मंथली मामले के तार मुख्यत: चरखी दादरी जिले से जुड़े हैं। यह मामला उजागर होने के बाद सरकार ने आचार संहिता के अंदर ही तत्कालीन डीसी अजय तोमर को कार्यभार से मुक्त कर दिया था। इसके अगले दिन ही उनकी पत्नी एवं चरखी दादरी एडीसी कम आरटीए संगीता तेतरवाल को भी कार्यभार मुक्त किया गया था। अजय तोमर के स्थान पर मुकेश आहूजा को चरखी दादरी डीसी बनाया गया था। उन्होंने कार्यभार संभालते ही ओवरलोडिंग को लेकर विभिन्न विभागों की बैठक ली थी। इसमें ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने का एक्शन प्लान तैयार किया गया था। गत जून के पहले सप्ताह में ही पूरा खाका तैयार कर मंजूरी के लिए प्रपोजल सरकार के पास भेजा गया था। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इस प्रपोजल को अभी सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। अगर सरकार इस प्लान को मूर्त रूप देने की स्वीकृति प्रदान करती है तो ओवरलोडिंग पर काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।
आरटीए टीम की मुखबिरी कर बदले जाते हैं ओवरलोड वाहनों के रूट
आरटीए टीम केवल मुख्यमार्गों पर ही ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करती है। चरखी दादरी में आरटीए टीम की लगातार ओवरलोडिंग माफिया रेकी करता है। आरटीए टीम के कार्यालय से निकलते ही व्हाट्सएप ग्रुपों पर लोकेशन शेयर की दी जाती है और इसके बाद ओवरलोड गाड़ियां अप्रोच सड़कों से होकर जिले से बाहर जाती हैं। अगर माइनिंग जोन में ही इन पर शिकंजा कसा जाएं तो ये गाड़ियों प्रमुख या अप्रोच सड़कों तक पहुंच ही नहीं पाएंगी।
पुलिस को फिर से चालान की पॉवर देने की सिफारिश भी ठंडे बस्ते में
प्रदेश सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले ओवरलोडिंग वाहनों के चालान की पावर 15 विभागों को दी थी, जिनमें पुलिस विभाग भी शामिल था। उस समय चरखी दादरी जिला पुलिस अन्य विभागों की तुलना में सबसे अधिक ओवरलोडिंग के चालान करती थी। इसके बाद सरकार ने सभी विभागों से पावर छीनकर आरटीए को ही चालान करने का अधिकार दे दिया। इसके बाद से ही पुलिस वाहन ओवरलोड होने के बावजूद केवल कागजात देखने तक ही सीमित है। तत्कालीन डीसी मुकेश आहूजा ने प्रदेश सरकार से पुलिस विभाग को दोबारा से चालान करने की पावर देने की सिफारिश की थी। यह अब तक ठंडे बस्ते में है।
चरखी दादरी के डीसी धर्मवीर सिंह ने कहा कि मुझसे पहले चरखी दादरी के डीसी रह चुके मुकेश आहूजा ने माइनिंग जोन में ही ओवरलोड डंपरों पर कार्रवाई करने की प्लान तैयार कर सरकार को भेजा थी। उन्होंने पुलिस विभाग को चालान की पावर देने की भी सिफारिश की थी। फिलहाल प्रपोजल की स्टडी चल रही है।