- जगह के अभाव से अधिकारी बूथ संख्या में नहीं कर पा रहे विस्तार, 9 बूथों से हो रहा संचालन तो कई रूटों की बसें खड़ी हो रहीं बिन बूथ
- अस्थायी बूथ ढूंढने में यात्रियों को आ रही दिक्कतें
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पिछले 33 साल में बसों के संचालन के लिए दादरी बस स्टैंड परिसर में महज तीन ही बूथ बढ़े हैं। दूसरी ओर बस स्टैंड परिसर में बूथ संख्या कम है। इससे कुछ रूटों की बसें इधर-उधर खड़ी हो रही हैं। यात्रियों के लिए इन बसों को ढूंढना आसान काम नहीं है। वहीं, अधिकारियों का तर्क है कि जगह की कमी से बूथ संख्या में विस्तार नहीं कर पा रहे हैं।
दादरी बस स्टैंड परिसर में बूथ संख्या कम होने के चलते यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बूथों की कमी का आलम यह है कि एक बूथ से दो से तीन रूटों की बसें रवाना हो रही हैं। कुछ रूट ऐसे हैं, जिनकी बसें बस स्टैंड परिसर में इधर-उधर खड़ी की जाती हैं। नए यात्रियों के लिए इन बसों तक पहुंचने की डगर आसान नहीं है। यात्रियों ने अधिकारियों से बूथों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
दरअसल, वर्ष 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मास्टर हुकम सिंह ने सब डिपो से डिपो का दर्जा दिलवाया था। इसके बाद 10 साल तक डिपो रहने के बाद इसे दोबारा सब डिपो बनवाया गया। वर्ष 2011 में बने सतपाल सांगवान ने इसे पुन: डिपो बनवाया। उससे पहले तक यहां 6 बूथ थे, जबकि बाद में बूथ संख्या बढ़ाकर 9 कर दी गई।
- इन रूटों की बसों के लिए नहीं स्थायी बूथ
बस स्टैंड परिसर में कम से कम 15 बूथ होने चाहिए। यहां जगह की कमी से रानीला, पिलाना, मातनहेल, ऊण, माईकलां बांस और चंदेनी व बेरी रूटों पर चलने वाली बसों के संचालन बूथ नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में इन रूटों की बसें बिना बूथ के खड़ी करनी पड़ती हैं।
- 59 बसों की भी कमी
नियमों की अगर बात करें तो दादरी डिपो में बसों की भी कमी है। फिलहाल, डिपो के बेड़े में 101 बसें शामिल हैं। 15 बसें किलोमीटर योजना के तहत चलाई जा रही हैं। आबादी और जिला बनने के साथ ही डिपो का दर्जा होने से यहां से कम से कम 175 बसों का संचालन होना चाहिए।
वर्सन:
जगह के अभाव में बूथ संख्या में विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। नया बस स्टैंड बनने के बाद ही सभी बूथ बन सकेंगे।
-नवीन शर्मा, महाप्रबंधक, दादरी रोडवेज डिपो
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बस स्टैंड परिसर में पेड़ पर बोर्ड लटकाकर बनाया गया अस्थायी बूथ। संवाद
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बूथ पर लगीं बसों के चलने के इंतजार में बस स्टैंड परिसर में खड़ीं बसें। संवाद