इंडेंट से 200 क्यूसेक कम नहरी पानी मिलने का असर जिले की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है। इस बार नहरी पानी कम मिलने से जिले की कई डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी नहीं छोड़ा जा सका, जिसके कारण गांवों के जलघर सूखे हैं। इस समय जिले के 40 जलघरों के टैंक खाली हैं और इनमें शहर का कपूरी जलघर भी शामिल है। इस जलघर से जुड़े शहर के 30 फीसदी क्षेत्र में पिछले चार दिनों से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लोग और ग्राम पंचायतें समस्या के समाधान के लिए कभी जन स्वास्थ्य विभाग तो कभी कृषि विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
जिले की नहरों में पिछले 10 दिनों से पानी चल रहा है और अभी तक मात्र 17 जलघरों को ही भरा गया है। जिले में अभी 40 जलघरों के टैंक सूखे पड़े हैं और एक सप्ताह ही नहर में पानी चलना है। इस टर्न के बाद 24 दिन में नहरी पानी मिलेगा, जबकि जलघरों की स्टोरेज क्षमता मात्र 12 से 15 दिन ही है। ऐसे में सिंचाई विभाग और जन स्वास्थ्य के लिए सभी 58 जलघर और 65 तालाबों में पानी भरना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसके कारण ग्रामीण आबादी का बड़ा तबका पेयजल संकट झेल रहा है।
नहरों में गत नौ अक्तूबर को पानी छोड़ा गया था। सिंचाई विभाग ने 900 क्यूसिक पानी का इंडेंट भेजा था, लेकिन जिले को 700 क्यूसेक पानी ही मिला। सिंचाई विभाग व जनस्वास्थ्य विभाग ने तालमेल के साथ इस पानी का सही प्रकार से प्रबंधन किया जाता तो जलघरों में पानी डाला जा सकता है।
90 बोरिंग ट्यूबवेलों का सहारा ले रहा विभाग
--जिले में इस समय 90 बोरिंग ट्यूबवेेल के जरिये भी पेयजल की सप्लाई की जा रही है। जनस्वास्थ्य विभाग ने कई गांवों में यह ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। इन गांवों में जलघरों की कमी है। ट्यूबवेल भी लगातार जल दोहन के चलते बीच-बीच में जवाब दे जाते हैं। इस पर विभाग को फिर से नया बोरिंग करना पड़ता है।
बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में इस बार महज पांच दिन ही चलेगा पानी
जिले की मेन लोहारू कैनाल में पानी चल रहा है। पांच दिन के लिए बधवाना डिस्टीब्यूट्री में भी पानी छोड़ा जाना है। लोहारू कैनाल से मेन चंपापुरी जलघर में पानी डाला जाता है। मेन चंपापुरी जलघर में पानी डाले जाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस मेन जलघर में चार वाटर स्टोरेज टैंक बने हैं, जबकि दूसरे रामनगर जलघर में दो वाटर टैंक बने हुए हैं। शहर में पेयजल की स्टोरेज क्षमता 3750 लाख लीटर है।
लोग बोले - तीन दिनों से नहीं हो रही आपूर्ति
- पिछले तीन दिनों से पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है। विभाग के अधिकारियों के पास शिकायत लेकर जा चुके हैं और वो नहरी पानी कम मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
राकेश, वार्ड-14
- पहले वार्ड में एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति होती थी लेकिन अब पिछले चार दिनों से आपूर्ति नहीं हुई है। जलघर पर गए तो वहां वाटर टैंक सूखे हैं।
कृष्णलाल, वार्ड-10
- नियमित पेयजल आपूर्ति न होने से लोग परेशान हैं। हर नहरी टर्न पर पेयजल आपूर्ति गड़बड़ाती है। विभाग को आबादी के अनुरुप जलघरों की स्टोरेज क्षमता बढ़ानी चाहिए।
राजकुमार, वार्ड-13
- पेयजल संकट के चलते लोग पानी के टैंकर खरीदकर पी रहे हैं। पेयजल आपूर्ति का शेड्यूल गड़बड़ाया हुआ है और जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जोगेंद्र, वार्ड-13
जलघर के वाटर टैंकों में पानी डालना शुरू कर दिया है। पंप एवं मोटर के जरिये पानी डाला जा रहा है। कुछ दिनों में शहर के वाटर टैंक भर दिए जाएंगें। पानी की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। बधवाना नहर में पांच दिन के लिए पानी छोड़ा जाएगा ताकि नहर पर पड़ने वाले जलघरों को भरा जा सके।
ओमदत्त, एसडीओ, सिंचाई विभाग