झोझूकलां ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर निकाली गई झांकी।
झोझूकलां। आज भौतिकता की चकाचौंध में मानव अंधा हो चुका है और मानवीय मूल्यों का पतन हो रहा है, जो चिंता का विषय है। हम सभी इस जन्माष्टमी पर्व पर मानव को मानवता का पाठ पढ़ा समाज को दिव्य बनाने का संकल्प लें, तो यह पर्व मनाने का अर्थ सार्थक होगा। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की झोझूकलां शाखा प्रभारी ब्रह्माकुमारी ज्योति ने स्थानीय सेवा केंद्र में कृष्ण जन्माष्टमी व स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित झांकियों का अवलोकन करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि स्वर्णिम भारत के निर्माण के लिए भगवान कृष्ण के समान दिव्य गुण जीवन में धारण कर समाज में रचनात्मक कार्य करें। ब्रह्माकुमारी ज्योति ने बताया कि भगवान कृष्ण सतयुगी दुनिया के पहले प्रिंस हैं, जो कि सर्वगुण संपन्न, 16 कला संपूर्ण, संपूर्ण निर्विकारी और मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। हमें भी भगवान कृष्ण के समान सर्वगुण धारण कर संपूर्ण निर्विकारी बन आपस में सहयोग सद्भावना और भ्रातृत्व की भावना पैदा कर समाज को श्रेष्ठ बनाने का यह संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण को योगेश्वर भी कहा जाता है, क्योंकि हम भी राजयोग के बल पर अपने विकारों पर विजय प्राप्त कर कृष्ण समान योगी बन सकते हैं। ब्रह्माकुमारी नीलम ने बताया कि हमें आपस में एक-दूसरे से गुण स्वीकार करने चाहिए, नकारात्मक और अनावश्यक बातों से दूर रहना चाहिए, तभी हमारा जीवन दिव्य गुणों की खुशबू से महक सकता है।