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आयुष्मान योजना से बुजुर्ग महिलाओं की आंखों को दोबारा मिली रोशनी

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परेशन कराने वाली बुजुर्ग महिला परमेश्वरी देवी। - फोटो : CharkhiDadri
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना के तहत दो निजी अस्पतालों में अब तक 40 मरीज आंखों का ऑपरेशन करवा चुके हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। अहम बात यह है कि पैनल में शामिल दोनों निजी अस्पताल सभी ऑपरेशन सफल रहने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद मरीजों को पहले की तरह की अब स्पष्ट नजर आने लगा है। ज्यादातर ऑपरेशन सफेद मोतियाबिंद के किए गए हैं। इन अस्पतालों में दादरी जिले के अलावा झज्जर जिले के कुछ मरीजों ने भी आंखों के ऑपरेशन करवाए हैं।
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आयुष्मान योजना का पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में लाभ लेने के लिए गोल्डन कार्ड का बना होना जरूरी है। इस समय सिविल अस्पताल और बौंदकलां सीएचसी में आयुष्मान काउंटर पर गोल्डन कार्ड बनवाए जा रहे हैं। बाढड़ा उपमंडल के गोपी सीएचसी और झोझूकलां सीएचसी में आयुष्मान काउंटर की सुविधा अभी नहीं है। इस योजना का लाभ सात अलग-अलग कैटेगरी के लोगों को मिलेगा। अधिक जानकारी के लिए आयुष्मान काउंटर पर जाकर कोई भी संपर्क कर सकता है। आयुष्मान योजना के तहत आंखों का निशुल्क ऑपरेशन कराने वाले बुजुर्गों से बातचीत पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट....
ऑपरेशन रहा सफल, परमेश्वरी देवी को अब नहीं दिखता धुंधला
झज्जर जिले के गांव झांसवा निवासी परमेश्वरी देवी पिछले करीब डेढ़ साल से धुंधला दिखने की समस्या से परेशान थी। टेस्ट कराने पर पता चला कि उसे सफेद मोतियाबिंद है। ऑपरेशन का खर्च दस से बारह हजार बताया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते वह ऑपरेशन नहीं करवा पाई। करीब तीन महीने पहले गोल्डन कार्ड बनवाया और शहर के कृष्णा आई अस्पताल में पहुंचकर अपना ऑपरेशन कराया, जो सफल रहा। अब परमेश्वरी देवी पहले को पहले की तरह ही साफ दिखने लगा है।
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मंजू देवी के लिए भी वरदान साबित हुई आयुष्मान योजना
झज्जर जिले के गांव बहराणा निवासी मंजू देवी पिछले करीब 21 माह से आंखों की बीमारी से परेशान थी। मंजू को एक आंख से धुंधला नजर आता था। झज्जर सिविल अस्पताल में चेकअप कराने पर पता चला कि उसे सफेद मोतिया है। मंजू जब निजी रोहतक के एक निजी अस्पताल पर पहुंची तो ऑपरेशन का खर्च करीब साढ़े 12 हजार रुपये बताया गया। करीब साढ़े चार माह पहले मंजू देवी ने अपना गोल्डन कार्ड बनवाया और शहर के कृष्णा अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंची। यहां किया गया ऑपरेशन सफल रहा।
हवा सिंह को भी था मोतियाबिंद, सामने रखी वस्तु नहीं आती थी नजर
ढाणी फौगाट निवासी हवा सिंह ने पैनल में शामिल शहर के गीतांजलि आई अस्पताल में अपना ऑपरेशन करवाया था, जो सफल रहा। हवा सिंह ने बताया कि उसे मोतियाबिंद था और सामने रखी वस्तु भी नजर नहीं आती थी। ऑपरेशन का खर्च वहन करना बेहद मुश्किल था। इसलिए किसी ग्रामीण की सलाह पर आयुष्मान योजना के तहत अपना गोल्डन कार्ड बनवाया और गीतांजलि अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचा। यहां करवाया गया ऑपरेशन सफल रहा और अब कुछ दूरी तक का भी आंखों से नजर आने लगा।
आंखों में जाले से परेशान था रमेश, 25 दिन पहले मिल गई राहत
शहर निवासी बुजुर्ग रमेश ने बताया कि उसे बहुत बाद में पता चला कि वह आयुष्मान योजना का पात्र हैं। इसके तुरंत बाद उसने आयुष्मान काउंटर पर पहुंचकर अपना गोल्डन कार्ड बनवा लिया। रमेश ने बताया कि करीब एक साल से उसे आंखों से कम नजर आने लगा था, जिसके चलते वह परेशान थे। कृष्णा आई अस्पताल में पहुंचकर उसने चेकअप करवाया तो पता चला कि आंखों में जाले की समस्या है। इसके बाद उसने आंखों का जाला हटवाने के लिए यहां ऑपरेशन करवाया, जो सफल रहा।
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